गई भैंस पानी में, ..तो इसलिए टाला जा रहा है मध्यप्रदेश में मंत्रीमंडल विस्तार





मंत्रीमंडल विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों को स्थान देने से पूर्व भाजपा ने उनकी उनके क्षेत्रों में स्थिति जानने के लिए एक गुपचुप सर्वे कराया है. इसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्री और विधायकों की उनके क्षेत्र में ऐसी स्थिति नहीं पाई गई कि वह अपनी सीट बचा पाएंगे. इसके बाद से भाजपा आलाकमान हैरान रह गया है, और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना मंत्रीमंडल विस्तार फिलहाल लॉकडाउन का नाम लेकर कुछ समय को टालने के लिए कहा गया है. 


पंकज पाराशर छतरपुर 
  / digitalindia18.com

नई दिल्ली / मध्यप्रदेश में पूर्व की कमलनाथ सरकार के बारे में कहा जाता था कि वह कोरोना की आड़ लेकर विश्वासमत, बहुमत परीक्षण टाल रही थी, वही बात एक बार फिर अब वर्तमान शिवराज सरकार के बारे में कही जाने लगी है कि वह मंत्रीमंडल विस्तार को कोरोना की आड़ लेकर टाल रहे हैं. बजह जानने के लिए तह में जाने पर पता चला है कि मंत्रीमंडल विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों को स्थान देने से पूर्व भाजपा ने उनकी उनके क्षेत्रों में स्थिति जानने के लिए एक गुपचुप सर्वे कराया है. इसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्री और विधायकों की उनके क्षेत्र में ऐसी स्थिति नहीं पाई गई कि वह अपनी सीट बचा पाएंगे. इसके बाद से भाजपा आलाकमान हैरान रह गया है, और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना मंत्रीमंडल विस्तार फिलहाल लॉकडाउन का नाम लेकर कुछ समय को टालने के लिए कहा गया है. 





मध्यप्रदेश में कांग्रेस के बागियों की स्थिति भाजपा में प्रतिद्वंदियों जैसी है. इसी कारण अब भाजपा भी मंत्रिमंडल विस्तार में इन पूर्व मंत्रियों की भागीदारी पर संशय कर रही है. जानकारी के अनुसार भाजपा आलाकमान के इशारे पर एक सर्वे एजेंसी ने मध्यप्रदेश में इस्तीफा देने वाले कांग्रेस विधायकों और सरकार के उन मंत्रियों का सर्वे किया था. सर्वे में यह बात सामने आई तो आलाकमान परेशान हो गया है, जिसमें भाजपा के टिकट पर कांग्रेस के 1 दर्जन से कहीं अधिक पूर्व विधायक व मंत्रियों की हालत पतली दिखाई गई है. 

बताया जाता है कि भाजपा आलाकमान इन सर्वे को लेकर चिंतित है और यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपने मंत्रीमंडल विस्तार में कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों को स्थान देने में कंजूसी बरती. अन्यथा वायदे के मुताबिक इस्तीफा देने वाले सभी मंत्रियों को पुनः मंत्री बनाया जाना था. अब संभावना इस बात की भी बन गई है कि अब मुख्यमंत्री अपना मंत्रीमंडल विस्तार इसी कारण फिलहाल लॉकडाउन का नाम लेकर कुछ समय को टाल भी दें, परंतु ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक उपचुनाव में सीट बचा लेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है. 

सर्वे की मानें तो सिंधिया कितना भी पसीना बहायें, वह भी बेकार जा सकता है. स्थिति तो यहां तक बताई जा रही है कि वर्तमान के सिंधिया समर्थक दोनों मंत्री भी अपनी सीट उपचुनाव में बचा पायेंगे, इसका भी कोई भरोसा नहीं है. वहीं पूर्व भाजपा प्रतिद्वंदियों ने भी अपनी-अपनी सीटों से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, उन्हें नाराज किया गया तो वह भी ठीक नहीं होगा. ऐसे में इनमें से कई बगावत भी कर सकते हैं. कुल मिलाकर जैसे तैसे मध्यप्रदेश में बन गई अपनी सरकार भाजपा गंवाना नहीं चाहेगी, भले ही उसे पूर्व में सिंधिया से किये गए वादे तोड़ना पड़ जाएँ. सो माना जा रहा है, अभी से पूरी रणनीति के तहत भाजपा जीतने वाले प्रत्याशियों पर ही दांव लगाएगी. 




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