आटा गूंथने के बाद महिलाओं द्वारा उसमें लगाए जाने वाले उँगलियों के निशान के पीछे का रहस्य




क्या आपने कभी गौर किया कि महिलाएं जब खाना बनाने के लिए आटा गूंधती हैं, तब आटा गूंथने के बाद उस पर उंगलियों से दबाकर या थोड़ा सा आटा तोड़कर, उसी आंटे पर चिपकाकर एक निशान सा क्यों बनाती हैं, आपकी माता जी या दादी जी ने बचपन में हो सकता है यह बात आपको बताई हो.



दरअसल इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है, बल्कि हमारी एक प्राचीन मान्यता है. हिंदुओं में पूर्वजों एवं मृत आत्माओं को संतुष्ट करने के लिए पिंडदान की विधि बताई गई है. पिंडदान के लिए जब आटे की गोल लोई (जिसे पिंड का प्रतीक कहते हैं) बनाई जाती है तो वह बिल्कुल गोल होती है. इसका आशय होता है कि यह गोल गूंथा हुआ आटा पूर्वजों के पिंड के प्रतीक हेतु उन्हें निमंत्रित करने के लिए है मान्यता है कि इस तरह का आटा देखकर पूर्वज किसी भी रूप में आते हैं और उसे ग्रहण करते हैं. उसमे अपनी उपस्थिति दर्ज करते है. इसीलिए रात को बचा हुआ आटा फ़्रिज में रखने से भी मना किया जाता है.

यही कारण है कि जब मनुष्यों के भोजन के लिए ग्रहण करने के लिए आटा गूंथा जाता है तो उसमें उंगलियों के निशान बना दिए जाते हैं. यह निशान इस बात का प्रतीक होते हैं कि रखा हुआ आटा, लोई या पिंड पूर्वजों के लिए नहीं बल्कि आम इंसानों के भोजन के लिए है.



प्राचीन काल में महिलाएं प्रतिदिन एक लोई पूर्वजों के लिए, दूसरी गाय के लिए, तीसरी कुत्ते के लिए निकालती थी. घर में अनेक महिलाएं होती थी, उंगलियों का निशान लगाने से पता चल जाता था कि इन्सानों के लिए गूंथा हुआ आटा कौन सा है.
ऐसे ही जब दाल बाटी बनाई जाती है, तब उसके गोलों को भी अंगूठे से दबाकर निशान बना दिया जाता है. जब मक्खन बड़ा बनाया जाता है, तब उसके गोले में भी बीच से बढ़ाकर निशान बनाकर उसे मनुष्य के लिए उपयोगी बनाया जाता है.

याद करें, जब बचपन में कोई खाने की वस्तु खाते खाते गिर जाती थी, तब उसे उठाकर खाना मना था, क्योंकि हमारे आसपास ऐसी अदृश्य ऊर्जा रहा करती है, जो ऐसी वस्तुओं के गिरते ही उस पर अपनी नजरें गड़ा दिया करती हैं औऱ फिर जब हम उस वस्तु को खा लेते हैं तो वह आसानी से हजम नहीं होती. 

याद करें जब घर से खाना बनाकर कहीं बाहर ले जाते हैं तब उसमें थोड़ा सा जूठा कर लिया जाता है, या कोयले आदि काले रंग का टुकड़ा डाल देने से भी बुरी शक्तियों की नजर नहीं लगती है. स्त्री, पैसा औऱ भोजन सदियों से पर्दे की वस्तु रही है.



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