आखिर क्यों सरकार ने बना लिया मधुशाला का मधु चखने का मन?



ये वो रस है जनाब जिसे शराब कहते हैं, जिसमें सरकारें भी झूम, मदमस्त हो जाती हैं .
मदिरा से गलबैयां : कमलनाथ सरकार पर शिवराज का तंज था कि बापू की आत्मा कहरा रही होंगी,  तो मामाजी अब क्या बापू के बन्दर... कोरोना वायरस से जूझते पुलिसकर्मी  और सरकारी अमला अब मयखानों पर होगा तैनात, दो गज दूरी जरुरी जो है. .
                   


कोरोना वायरस ने अब ग्रीन झोन में पैर पसारने शुरू कर दिये है.इधर  मप्र सरकार ने शराब कि दुकाने खोलने का आज निर्णय ले लिया. मजेदार है कि शिवराज सरकार ने 3 मई को तय किया था कि 17 मई तक शराब दुकाने बंद रहेगी,  लेकिन 24 घंटे में ही पलटी मार दी. अब इस निर्णय की जमकर आलोचना हो रही है. सरकार से जनता पूछ रही है कि कोरोना का वायरस मारने के लिये क्या अब सरकार नई मयखाने ओषधि का प्रयोग कर रही है? क्या राजस्व की फ़िक्र है या शराब ठेकेदारों पर अति मेहरबानी.


धीरज चतुर्वेदी     

मुख्यमंत्री को कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में उनके द्वारा 1 मार्च 2020 को  किया गया ट्वीट याद दिलाना होगा कि जिसके शब्द थे कि " है राम,  राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी की आत्मा  आज असीम पीढ़ा से कहरा रही होंगी. बापू नशा मुक्ति के लिये आजीवन प्रयास करते रहै और उनके नाम पर राजनीती करने वाली पार्टी आज उनके विचारों की ऐसे हत्या कर रही हे.  कुछ तो शर्म करो सरकार #MP मांगे जवाब.  अब जब शिवराज सिंह ही मुख्यमंत्री है तो खुद के ट्वीट के  65 दिनों में ही बेसुर हो गए. अब ना तो बापू की आत्मा की याद है और ना ही सरकार के शर्म की. 

अब तो सरकार कोरोना वायरस की भीषण आपदा को नज़रअंदाज़ कर शराब ठेकेदारों से गलबइया और मयखानो पर मेहरबान हो रही है. जब आज पूरा सरकारी महकमा वायरस से बचने के नियमों को लागू कराने दिन रात मेहनत कर रहा हे. ऐसे समय मयखानो को इस आदेश के साथ की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए खोलने की अनुमति दी जाती है तो इस दो गज दूरी का पालन आखिर कौन कराएगा. क्या पुलिसकर्मियों और सरकारी अमले की दारू के ठेको पर तैनाती होंगी ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके?  

वाह रे सरकार चाहै जानलेवा बीमारी से सेकड़ो की जान जा चुकी है और खबरे आ रही हैं कि कोरोना का संक्रमण आने वाले दिनों में उच्च स्तर पर होगा, पर सरकार बापू के बन्दर कि तरह अपने कान-मुँह-आँखे बंद किये है. बापू के बन्दर तो सन्देश बुराई का देते है पर सरकार वायरस के संकट में मयखाने खुलने के दुष्परिणाम से आँख-मुँह-कान बंद किये है. आम लोगो के पास आय के साधन बंद हैं, जो कुछ घर में होगा तो पीने वाले घर का आर्थिक ढांचा बिगाड़ कर सरकार की आर्थिक हालात ठीक करेंगे. शराब के कारण घरेलू अपराध सहित अन्य अपराधों का घटित होना तय है. विशेषज्ञों का मानना है कि एक और महानगरों से वायरस का ट्रांसपोर्टेशन होने कि सम्भावना बढ़ी है, वहीँ मयखाने का खुलना उस संक्रमण को संक्रमित करने में तेजी से मदद करेगा. फिलहाल तो मप्र सरकार ने मधुशाला का मधु चखने का मन बना लिया है. 
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News Digital India 18

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