VIDEO सचिव का कहना है शासन कुछ भी बोल देती है, पर उतनी मजदूरी देती नहीं, कम मजदूरी को लेकर सड़कों पर उतरे मजदूर


प्रदेश में करोना महामारी संकट के सताए मजदूर जैसे तैसे अपने गांव तो पहुंच गए हैं, लेकिन परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. सरकार मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने की बात कर रही है, परन्तु मजदूरों को कम मजदूरी दी जा रही है, इससे वे अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं ग्राम के सचिव का कहना है शासन कुछ भी बोल देती है, पर उतनी मजदूरी देती नहीं, सो कम मजदूरी को लेकर मजदूर सड़कों पर उतर विरोध के सुर बुलंद कर रहे हैं. 



सिवनी से विनोद सोनी की रिपोर्ट 

सिवनी/धनोरा/ देश प्रदेश में करो ना जैसी महामारी संक्रमण के चलते देशभर के मजदूर सरकार की मदद ना मिलने के कारण पैदल ही अपने घरों को पहुंच गए हैं सरकार मजदूरों को मदद दिलाने का भरोसा शुरू से ही करती आ रही है और गांव गांव खाद्यान्न भी पहुंचाया गया है, भले ही शासन की हर बात और हर आदेश पर अमल ना हुआ हो परंतु जितना ही सही ग्रामीण मजदूरों को सरकारी व्यवस्था और सहायता पहुंचा दी गई है सरकार नाराज मजदूरों को मनाने और उनको रोजगार दिलाने में कोई कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती और मजदूरों को उनका रोजगार दिलाने या कहें उनको मनाने के लिए गांव में ही मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत के माध्यम से मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने लगी हुई है

कुरौना महामारी संक्रमण के चलते देशभर मैं अपने रोजगार की तलाश में गए मजदूरों को मजबूरन अपने घरों को लौटना पड़ा है और अब गांव में रोजगार की उपलब्धता नहीं होने से उन मजदूरों को रोजगार का संकट छाया हुआ है करो ना जैसी विकट महामारी के दौर में सरकार उन मजदूरों को स्थानीय प्रशासन ग्राम पंचायत के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना चाह रही है और मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों के लिए कार्य उपलब्ध कराए जा रहे हैं परंतु नाराज मजदूर मजबूर होकर अब सड़कों पर उतरने के लिए तैयार है क्योंकि बेरोजगार मजदूर सरकार की इस रोजगार योजना से अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है सरकार कहती कुछ है और उनके नुमाइंदे यानी कि कर्मचारी करते कुछ है शासन की प्रशासन की दो तरह की बातों से बेरोजगार मजदूर मजबूर होकर अब सड़कों पर उतरने के लिए तैयार है

शासन बाहर  के शहरों से अपने अपने गांव तक पहुंचे उन बेरोजगार मजदूरों के लिए एक निश्चित दैनिक मजदूरी के तहत रोजगार उपलब्ध कराना चाहती है और उपलब्ध करा भी रही है परंतु निचले स्तर के कर्मचारियों के द्वारा मजदूरों को  प्रति दिन काम के आधार पर दिए जाने वाली राशि में कटौती करके जो राशि दी जा रही है उस राशि के कारण मजदूर ठगा महसूस कर और आक्रोशित हो रहा है

वही पूरे मामले पर जिम्मेदार मजदूरो को समझाइस दे कर कार्यस्थल पर कार्य प्रारंभ करा चुके है.और कार्ययस्थल पर जाकर  अधिकारियों द्वारा मजदूरो की समस्याओं पर मजदूरों को मनरेगा के भुगतान प्रणाली की विस्तृत जानकारी देकर  दैनिक मजदूरी प्रतिदिन की  190/- रुपये प्रतिदिन टास्क दर पर भुगतान होने की जानकारी दी गई.

 वहीं इनका कहना है 

कम मजदूरी की बजह से हम लोग सडको पर उतरे,  शासन का कहना है कि लगभग दो सौ रुपये मजदूरी और नियम का पालन करें हम हर नियम का पालन कर रहे हैं और सचिव का कहना है कि शासन कुछ भी बोल देती है पर उतनी मजदूरी देती नहीं. 
- कन्हैया लाल यादव -मजदूर 

धनोरा के कुर्नभटा गांव के लोगों का कम मजदूरी को लेकर मामला था मौके पर इंजीनियर को बुलाकर जानकारी ली गई और मजदूरों को मूल्यांकन की बात बतलाकर समझाईस दी गई. 
-संजय बारसकर तहसीलदार धनोरा

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