यह ज़िंदा रहने की लड़ाई है


फोटो - सुरेन्द्र रघुवंशी  

निर्मम कुल्हाड़ियों के अनगिनित प्रहारों से
काट दिए जाने के बावजूद भी
न तो हिम्मत हारता है
और न ही मरता है पेड़

जहां से काटा जा चुका है उसे कुछ समय पहले
वहीं से फूटती है उसमें जीवन की उम्मीद भरी हरियाली
आकाश की ओर झाँकती हुई

जैसे कोई नवजात कौतूहल से देखता है दुनिया को
वैसे ही देखता है खुद के ही घावों से जन्म लेता नया पौधा
हमें जन्म लेना होता है बार-बार
अपने ही दुर्दिनों की ज़मीन से

यह संसार समग्रता में एक बड़ा युद्ध क्षेत्र है
जिसका चयन हमने नहीं किया
जहां बलात धकेल दिया जाता है
क्रूर समय के द्वारा हमें
हमें लगता है कि हम किसी दुःस्वप्न का हिस्सा हैं
जबकि वह एक कड़वा यथार्थ होता है
इस रणक्षेत्र से हम बग़ैर लड़े नहीं भाग सकते
यहां पलायन के सारे रास्ते बंद हैं
लड़ना यहां जीने की पहली शर्त है
यह लड़ाई किसी को मारने की लड़ाई बिल्कुल नहीं है
यह ज़िंदा रहने की लड़ाई है
और उस चक्रव्यूह को तोड़ने की भी लड़ाई है
जिसके टूटने पर हमारे सामने
खुशहाल ज़िन्दगी का एक सुखद संसार होता है

अमानुषिक शोषणकारी बंधनों को तोड़ने के लिए
और जीने के लिए भी संघर्ष का एकमात्र रास्ता हमारे पास है
यह रास्ता इसी हरियाली से होकर जाता है
जो विश्वास के रूप में हमारे हृदय में है
और जो लड़ने को तो आतुर रहती है
पर आकाश की ओर बढ़ते रहने का उसका सपना
कभी स्थगित नहीं होता
इस सपने के लिए ज़रूरी रंग आते हैं इंद्रधनुष से

- सुरेन्द्र रघुवंशी 





Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a comment

abc abc