18 साल के अर्जुन के लक्ष्य पर फिदा हुए रतन टाटा,जेनेरिक आधार में किया निवेश


अर्जुन देशपांडे। यह वह युवा है जिसकी मेहनत, लग्न और कर्तव्यपरायणता पर देश के प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा फिदा हो गए हैं। अर्जुन देशपांडे देश में सबसे कम कीमत की दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए चर्चा में आए हैं। इनकी दवा कंपनी का नाम है जेनेरिक आधार। जी हांख वही जेनेरिक आधार जो कैंसर की सबसे सस्ती दवाइयां बाजार में उतारने का दावा कर रही है। महज 18 साल की उम्र में ही अर्जुन देशपांडे ने आज देश में फार्मेसी कारोबार में नया मुकाम हासिल कर लिया है।  


आकाश नागर    

शायद यही वजह है कि रतन टाटा ने उनसे कोलैबोरेशन किया और उनकी कंपनी जेनेरिक आधार में निवेश कर लिया है। अर्जुन देशपांडे का यह फार्मेसी बिजनेस महज 17 लाख में शुरू हुआ था जो आज 5-6 करोड़ प्रतिवर्ष टर्नओवर तक पहुंच चुका है। हालांकि, इसकी फ्रेंचाइजी अभी मुंबई, पुणे जैसे बड़े शहरों में ही है। पूरे देश में जेनरिक आधार के 33 रिटेलस है। लेकिन धीरे-धीरे यह कंपनी पूरे देश में सस्ती दवाओं की ब्रांड बनकर कब्जा करने की योजना बना रही है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने देश के युवाओं को स्वरोजगार के लिए स्टार्टअप शुरू करने की अपील की थी। इसके बाद कई लोगों द्वारा स्टार्टअप शुरू किए गए हैं। इसी कड़ी में मुंबई के 18 साल के युवा उद्यमी अर्जुन देशपांडे ने भी स्टार्टअप की शुरुआत की थी। महज 16 साल की उम्र में अपना स्टार्टअप शुरू करने वाले इस युवा की कंपनी में टाटा ने हिस्सेदारी खरीदकर नई पहल शुरू की है।

जी हां टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने मुंबई स्थित ‘जेनेरिक आधार’ फार्मेसी में पूंजी निवेश किया  है। इस कंपनी के फाउंडर 18 वर्षीय अर्जुन देशपांडे हैं। अन्य ऑनलाइन फार्मेसी की तुलना में जेनेरिक आधार अपनी दवाएं बाजार मूल्य से काफी सस्ती कीमतों पर बेचती है। देशपांडे ने इस डील की पुष्टि की है।

लेकिन डील की कीमत बताने से इनकार कर दिया है। वहीं उन्होंने कहा कि बिजनेस टाइकून रतन टाटा ने 3 से 4 महीने पहले ही उनके प्रस्ताव को सुन लिया था। टाटा को पार्टनरशिप की दिलचस्पी थी और वे मेंटर बनकर बिजनेस चलाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जल्दी ही इस डील के किए गए निवेश की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

जेनरिक आधार की खासियत ये है कि वह सीधे विश्व स्वास्थ्य संगठन-जीएमपी प्रमाणित फैक्ट्रियों से ही दवाइयां खरीदता है। जिससे उसकी गुणवत्ता पर भी कोई सवाल नहीं हो सकता। एक सर्वे से पता चला है कि 60 फीसदी भारतीय इसलिए पूरी दवा नहीं ले पाते हैं, क्योंकि बाजार में उसकी कीमत बहुत ही ज्यादा होती है। जेनरिक आधार का लक्ष्य 1000 फार्मेसियों के साथ फ्रेंचाइजी-बेस्ड मॉडल पर पार्टनरशिप करना है और अपना बाजार गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, नई दिल्ली, गोवा, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में बढ़ाना है।

बता दें कि अर्जुन देशपांडे ने अपने स्टार्टअप की शुरुआत दो साल पहले ही की थी, उस वक्त वे सिर्फ 16 साल के थे। जेनरिक आधार के बिजनेस मॉडल में 16 से 20 फीसदी का मार्जिन बचता है, जिसका लाभ आगे उपभोक्ताओं को मिल पाता है।
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