यादों के आले में



यादों के आले में
सहेज रखी हैं एक कंदील
मुस्कान की
जब भी होऊँगी उदास क़भी
तो हर्फ़ों को रुलाऊँगी नही अब
चुरा लूँगी थोड़ी थोड़ी ख़ुशी
औऱ रचूंगी एक खिलखिलाती
उम्मीदों से भरी कविता...!!
जिसमे इन्तज़ार कि कोई जगह
नही होगी,औऱ ना ही आँसूओं का सैलाब
एक नदी सा अस्तित्व  लिए मैं चल
पड़ूँगी हर दिल रचने एक  मासूम
औऱ खुशगवार नज़्म जो होगी
दिसम्बर की आख़री  तारीख़
औऱ जनवरी की पहली  तारीख़ सी
जहाँ अतृप्ता की चाह नही होगी
औऱ ना ही  इन्तज़ार का भास..!!
बस एक मिलन दिल का...!!
जो होगा सम्बल मेरी हँसी का..

नए साल की हार्दिक शुभकामनायें   

- सुरेखा अग्रवाल     




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