इंसान नहीं भगवान थे महाशय लक्ष्मीचंद आर्य जी




" देखकर दर्द किसी का जो आह निकल जाती है,
बस इतनी सी बात आदमी को इंसान से भगवान बनाती है । "
- आकाश नागर 

इस धरती पर आदमी तो करोडों है पर महाशय लक्ष्मीचंद आर्य जी की तरह इंसान से भगवान बन लोगों के दिलों में बसने वाले बहुत कम होते हैं । वह आज के छली कपटी लोगों की तरह नहीं थे जो दुसरे के दर्द पर बेदर्द हो जाते हैं। बल्कि वह उस दर्द पर सदा ही मरहम लगाने का काम करते रहे । इतना ही नहीं अपना दर्द समझ कर उसका निपटारा कराना वह अपना फर्ज समझते रहे । आज हमसे बिछुडे हुए उन्हें एक पखवाडा बीत गया । इस दौरान उनकी हजार बार याद आई। खासकर उन पलों की जो मेरी जिंदगी के अहम पड़ाव के दिनों से जुड़े हैं। यह पल जो मेरी साढ़े चार दशक की जिंदगी में उतार - चढ़ाव के रहे । मेरी सच की प्रतिबद्ध पत्रकारिता में  प्राण फूकते वह पल जो मुझे आज भी इस शूल भरे पथ पर चलने को अग्रसरित करते हैं। मेरी जिंदगी और मौत के बीच  जुझते मेरे वो दिन भला कैसे भुला सकता हूँ मैं .. 


विशेष : महाशय जी की श्रद्धाजलि सभा 29 दिसंबर को 

कचैडा के मोहन सिंह वैदिक विधालय में है



1  जब हरियाणा को हिलाया और अपहर्णकर्ताओ से मुझे छुडाया ...
आप सभी नही जानते होंगे कि  मेरा हरियाणा में एक बार अपहरण हो चुका है। यह करीब 30 साल पहले की बात है। जब मेरे पिताजी दिवंगत  श्री रामे चौधरी हरियाणा में भैसों का व्यापार करते थे। तब वह कभी कभार वह मुझे भी भैंस खरीदने हरियाणा भेज दिया करते थे। एक बार मैं अपने चचेरे भाई अजब सिंह अजबी के साथ हरियाणा गया था तो वहा हम दोनों को किडनैप कर लिया गया। तब चाचा जी महाशय लक्ष्मीचंद आर्य जी ने हरियाणा को हिलाकर रख दिया था। 

हरियाणा के डीजीपी को उन्होंने दिल्ली से फोन कराया ।अपनी शक्ति का एहसास कराया। हरियाणा के डीजीपी के सख्त रूख अपनाने के चलते ही अपहर्णकर्ताओ ने सरेंडर किया और मुझे पुलिस के हवाले कर दिया। वह दिन मैं आज भी नहीं भूला हूँ जब मैं हिसार थाने में था और महाशय लक्ष्मीचंद आर्य जी मेरे पिताजी एवं हरियाणा के विधायक बचन सिंह आर्य के साथ पहुंचे। उन्हें देखते ही पुलिस में हडकंप मच गया। थानेदार ने महाशय जी को सेल्यूट किया और कहा कि सर मेरी नौकरी बचा दीजिये। डीजीपी सर इस मामले पर बहुत नाराज हो रहे हैं। महाशय जी चाहते तो उस दरोगा की नौकरी जा सकती थी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बल्कि  हरियाणा के डीजीपी से कहकर थाना अध्यक्ष को सख्त कार्यवाही से बचाया। हालांकि बाद में थाना अध्यक्ष को लाईनहाजिर किया गया। 




2  हार्ट सर्जरी कराकर मुझे दिया जीवनदान ...
जब मैं हाईस्कूल में पढता था तभी मुझे दिल का रोग हो गया था । एक दिन जब महाशय जी  घर आए और मुझे कमजोर होते देखा तो खुद मुझे दिल्ली स्थित जीबीपंत हास्पिटल ले गए। वहा जाकर महाशय ने सीधे हास्पिटल के डायरेक्टर से बात की । जिस हास्पिटल में लोगों को आपरेशन की डेट मिलने के लिए ही महीनों तक इंतजार करना पड़ता है वहा उनके कहने पर तीसरे दिन ही मेरा इलाज कर दिया गया । 




3 मंत्री ने की मेरी शिकायत,महाशय जी को हुआ गर्व ...
यह अपने आप में विचित्र किन्तु सत्य घटना है। जब मेरी 'दि संडे पोस्ट' में एनसीआर इलाके की पत्रकारिता चल रही  थी। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रवि गौतम के जमीन घोटाले की सिरिज मैने निकाली थी । तब लखनऊ में महाशय जी और मंत्री जी की मुलाकात हुई। इस दौरान महाशय जी के साथ साए की तरह साथ रहने वाले उनके भान्जे पुष्पेन्द्र प्रधान जी भी उनके साथ थे। तब मंत्री रवि गौतम ने महाशय जी के सामने  मेरी खूब शिकायत की। मेरे द्वारा लिखी जा रही खोजी खबरों से परेशान मंत्री ने मेरे प्रति महाशय जी से जमकर नाराजगी प्रकट की और कहा कि आपके भतीजे की खबरों की वजह से मेरे प्रतिद्वंदियों  को मुद्दा मिल गया है। महाशय जी गांव में आए। मुझे याद है संडे का दिन था चाचा भीमचंद घर आए और मुझसे कहने लगे कि बेटा आज तेरी बहुत बडी कंपलैन्ड हैं। महाशय जी आज तेरी क्लाश लेंगे। मैं डरता डरता चौपाल पर पहुंचा । 




चौपाल पर भीड लगी थी। मुझे देखते ही महाशय जी मुस्कुराते  हुए कहने लगे कि आकाश आज तेरी कंपलैन्ड है। मैंने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया और  कहा कि कंपलैन्ड है तो आप मुस्कुराते हुए क्यों कह रहे हैं, सीरियस होकर कहिए तो मैं भी आपको बात को आत्मसात करूँ। इसके बाद उन्होंने मंत्री रवि गौतम से हुई मुलाकात का वाक्या बताया और कहा कि तेरी कंपलैन्ड तो मंत्री जी कर रहे थे लेकिन गर्व मुझे हो रहा था कि एक कैबिनेट मंत्री को मेरे भतीजे ने सच का आईना दिखा दिया है।  जिससे वह घबराया हुआ है। एक भतीजे के लिए इससे बड़ी बात क्या हो सकती थी कि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री मेरे देवतुल्य चाचा जी के सामने मेरी  शिकायत कर रहे थे और उन्हें मेरे लिखे पर गर्व हो रहा था। आज वह हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी वह शाबाशिया और हौसलाअफजाई मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत बन कर रह गई है। 



कभी कभी जब मैं अपनी सच को सामने लाने की पत्रकारिता से उठते विरोधियों के चक्रव्यूह को देखता हूँ तो ऐसे में मुझे मेरे गाॅड फादर महाशय लक्ष्मीचंद आर्य जी का हँसता - मुस्कुराता वह चेहरा दिखाई देता है जो मेरे लिए भगवान श्री कृष्ण की तरह सुदर्शन चक्र लिए खड़े हैं और  मुझे कलयुगी कौरवों का कच्चा चिट्ठा खोलने को उत्प्रेरित कर रहे हैं।




Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc