कमलनाथ के चाबुक से भयभीत अफसरशाही



गौरीसिंह, मुन श्रीवास्तव और वरूण कपूर की विदाई ने दिया बड़ा संदेश


भोपाल। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार पर सबसे बड़ा आरोप यह लगता था कि उनके कार्यकाल में पूरे प्रदेश में अफसरशाही हावी रहती थी। कमलनाथ की सरकार ने पिछले कुछ दिनों में ऐसे तबादले किए हैं कि पूरे प्रदेश की अफसरशाही में सनाका खींच गया है। मंत्रालय सहित संभाग और जिलों में बैठे अधिकारियों को साफ संदेश पहुंच गया है कि मुख्यमंत्री के आदेश की नाफरमानी बर्दाश्त नहीं होगी।
- रवीन्द्र जैन   

मध्यप्रदेश में पिछले 15 साल से अधिकारी स्वयं को सर्वेसर्वा मानकर काम करते रहे हैं। कमलनाथ सरकार में अब यह संभव नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री ने पिछले 7 दिन में 3 बड़े अधिकारियों को उनकी हैसियत दिखाकर पूरे अफसरशाही में बड़ा संदेश भेज दिया है। जो अधिकारी स्वयं को कमलनाथ का सबसे खास होने का दावा करते थे, उन्हें भी कमलनाथ ने सबक सिखा दिया है। मप्र आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष प्रदेश की अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरी सिंह स्वयं को सख्त अफसर दिखाने के प्रयास में मुख्यमंत्री और विभाग के मंत्रियों को भी नजर अंदाज कर रहीं थीं। ऐसे समय में जबकि मुख्यमंत्री सहित पूरी सरकार इंदौर में मैग्नीफिशेंट मप्र के प्रतिष्ठा पूर्ण आयोजन में लगी थी तभी गौरी सिंह ने प्रदेश के एक चर्चित आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल को बचाने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिख दिया। मुख्यमंत्री के आदेश पर ईओडब्ल्यू ने विवेक अग्रवाल द्वारा दिए गए ठेकों की जांच शुरू की थी। मुख्यमंत्री को गौरी सिंह का यह व्यवहार पसंद नहीं आया।


पिछले सप्ताह गौरी सिंह ने पंचायत चुनाव को लेकर परिसीमन का आदेश मुख्यमंत्री और मंत्री को बिना बताए जारी कर दिया। इसकी शिकायत मंत्री कमलेश्वर पटेल ने मुख्यमंत्री से की तो उन्हें तत्काल पंचायत एवं ग्रामीण विभाग से हटाकर महानिदेशक प्रशासन अकादमी जैसे कम महत्व के पद पर भेज दिया गया। इसी प्रकार कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके सबसे नजदीकी होने का दम भरने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनु श्रीवास्तव को पहले तो मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव वाणिज्यकर विभाग बना दिया, लेकिन भ्रम में विचरण कर रहे मनु श्रीवास्तव ने विभाग में तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री और मंत्री को दरकिनार किया तो मुख्यमंत्री ने उन्हें वाणिज्य कर से हटाने में देर नहीं लगाई। यह बात दूसरी है कि मनु श्रीवास्तव को लेकर मुख्यमंत्री ने इतनी दया दिखाई कि उन्हें पुराने विभाग नवकरणीय ऊर्जा के साथ आयुक्त उद्योग का भी प्रभार मिल गया।

आईपीएस में हड़कंप
आईएएस के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ का चाबुक आईपीएस पर भी चला। इंदौर जोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वरूण कपूर लगातार मुख्यमंत्री के निर्देश की अवहेलना कर रहे थे। खबर तो यह भी है कि कमलनाथ सरकार के आदेश पर इंदौर में जिस माफिया के खिलाफ बड़ी मुहिम चल रही थी, वरूण कपूर उस माफिया के न केवल खास बने हुए थे, बल्कि कार्यवाही में भी पर्याप्त सहयोग नहीं दे रहे थे। शनिवार को इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री को वरूण कपूर के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने रविवार को मंत्रालय खुलवाकर वरूण कपूर को इंदौर से चलता करने का आदेश जारी करा दिया।

यह तीन हुए खास
प्रदेश के तीन आईएएस अधिकारी ऐेसे हैं। जो तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में उनके खास माने जाते थे। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इन अधिकारियों की कार्यशैली को पसंद कर उन्हें बढ़ावा देकर पूरी अफसरशाही में यह संदेश भेजने की कोशिश की है कि यदि भाजपा शासन काल में अच्छा काम करने वाले अधिकारी उनके कार्यकाल में भी सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करेंगे तो उन्हें बढ़ावा मिलेगा। सबसे पहले अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने परखा और उन्हें ऊर्जा विभाग के साथ-साथ आर्थिकी और सांख्यिकी विभाग भी सौंप दिया। पूरे प्रदेश में शानदार कार्यशैली के लिए पहचाने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज श्रीवास्तव को पहले तो लूप लाइन भेजा गया लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनकी काबिलियत को पहचाना और उन्हें वर्तमान कार्य के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विभाग की जिम्मेदारी सौंप दी गई। शिवपुरी, मंदसौर और रीवा में कलेक्टर रहकर अपनी प्रभावी छाप छोडऩे वाले आईएएस अधिकारी ओपी श्रीवास्तव भी मुख्यमंत्री की नजर में चढ़ गए हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें मप्र जनसंपर्क संचालक बनाकर पूरे सरकार की छवि बनाने का जिम्मा सौंप दिया है।



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