जेब में सुबह के ब्रेक फास्ट से उठे स्कूल की टाइमिंग पर सवाल, 10 से 5.30 तक क्यों नहीं?




किसी भी संवेदनशील व्यक्ति के लिए ये

तस्वीर सचमुच दिल दहला देने वाली है.

बच्चों का भविष्य (जिसके बारे में कोई नहीं

जानता) सुरक्षित करने के चक्कर में हम

उनका वर्तमान अर्थात बचपन बर्बाद कर

रहे हैं, उनसे छीन रहे हैं. 

डॉ.कौशल किशोर पाण्डेय




एक ट्विटर यूजर ने एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें एक बच्चा उनींदा सा स्कूल में प्रार्थना की लाइन में खड़ा है और उसकी जेब में अधखाया सा पराठा ठूँसा हुआ दिख रहा है. इस पोस्ट में लिखा गया 'जेब में सुबह का ब्रेक फास्ट, अधूरी नींद, स्कूल की टाइमिंग 10 बजे से 5.30 तक क्यों नहीं, कृपया सोचें. पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई है. हम समझते हैं निश्चित रूप से विषय को गंभीरता से लिया जाकर समय परिवर्तित होना ही चाहिए. 



पोस्ट शेयर करते हुए श्री डॉ.कौशल किशोर पाण्डेय जी लिखते हैं किसी भी संवेदनशील व्यक्ति के लिए ये तस्वीर सचमुच दिल दहला देने वाली है. बच्चों का भविष्य (जिसके बारे में कोई नहीं जानता) सुरक्षित करने के चक्कर में हम उनका वर्तमान अर्थात बचपन बर्बाद कर रहे हैं, उनसे छीन रहे हैं. इस सम्बन्ध में सिर्फ नेताओं को ही नहीं, हम अभिभावकों को भी गंभीरता पूर्वक सोचना होगा. 

श्री Kailash Sharma जी ने प्रतिक्रिया दी है यह अनदेखी ही अंधकार में ढ़केलती जा रही, जो होश में रहते वो ही देख पाते हैं. 

श्री Kannu Mishra जी लिखते हैं हमारे पड़ोस में 4 साल की बेटी 9:00 बजे स्कूल जाती है 3:00 बजे स्कूल से आती है 5:00 बजे ट्यूशन जाती है और 7:00 बजे घर आती है और घर में भी पढ़ाई करती है. 

श्री Manish Sharma जी लिखते हैं बिल्कुल समय परिवर्तित होना चाहिए

Aniruddha Shukla - Many reasons to make the generation MBB.S.,B.E. graduates to join the jobs of peons. After spending lakhs of rupaye.

Aniruddha Shukla - Education ? Why ,whom,how,.

Bharat Kumar Dave जी लिखते हैं सिखाने के नौकर (गुरु नहीं) कैसे बंधे रहें, नौनिहालों की किसे चिंता हैं? हम मालिक हैं, जो सोचते हैं सही है. 




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