तीज


भाद्र पद मास शुक्ल पक्ष तृतीया,
गौरी शंकर से हथ जोर,
पिय संग साथ सुहागिन माँगे,
तीज मनावत है चहुँओर।

सजतीं और सवारतीं नख शिख ,
दमके आनन, रक्तिम ओठ,
मधुर वचन , चंचल नयनामृत,
माँग सिंदूरी, लाल कपोल,
तीज मनावत हैं चहुँओर।
स्वर्णिम आभा सहज समर्पण ,
देखन चाहत वो मनमोर।
भृकुटी सहज, नयन कजरारे,
शरमाये क्यों आँचल ओढ़,
तीज मनावत हैं चहुँओर।
माथे टिका, भाले बिंदिया,
दमकत मस्तक, साँझे भोर,
कान में झुमका नाक नथनिया,
हार की आभा, मन अँजोर,
तीज मनावत हैं चहुँओर।
बाजूबंद कंगन व शंकर,
कमर करघनी पायल शोर,
पहन सुहागिन पूजन करतीं,
तीज मनावत हैं चहुँओर।
सभी सुहागिनों को हरितालिका तीज की अनेकानेक शुभकामना।
- स्नेहलता द्विवेदी    

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