खेती हो या व्यवसाय, परिश्रम और इच्छाशक्ति से मिलती है कामयाबी

सफलता की कहानी    

  

इंसान में अपने पैरों पर खड़े होने की चाह हो, तो कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। चाहे वह खेती-किसानी का काम हो या लघु व्यवसाय। इस शाश्वत सत्य को स्वीकारते ही छिंदवाड़ा जिले के किसान राजेन्द्र मंडराह और विकास कावड़े थोड़े समय में ही स्वावलंबी बन गये हैं।
- अशोक मनवानी 

जिले के ग्राम डूंडा सिवनी निवासी किसान राजेन्द्र मंडराह को ट्रैक्टर मिला, तो उसकी खेती-किसानी का तरीका ही बदल गया। राजेन्द्र को पौने छह लाख रूपये का ट्रेक्टर खरीदने के लिए मिली सवा लाख की अनुदान राशि बड़ा सहारा बन गई। जब मेहनत के साथ इच्छाशक्ति प्रबल हो, तो खेती भी लाभ की हो जाती है। राजेन्द्र को गांव में ही अनेक किसानों के खेतों पर जुताई-बोवाई का काम मिल गया है। ट्रैक्टर से उसे लगभग दो लाख रूपये की अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

जिले के बिछुआ नगर निवासी विकास कावड़े ने मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में इलेक्ट्रानिक्स कारोबार के लिए दो लाख रूपये का कर्ज लिया। उसे एक लाख चालीस हजार रूपये के बैंक कर्ज के साथ 60 हजार रूपये का अनुदान भी मिला। अब विकास ने लघु व्यवसाय शुरू कर दिया है। हर महीने अपनी दुकान से निश्चित मासिक आय प्राप्त करने के साथ ही बैंक की किश्त भर रहा है। अब गाँव के दूसरे पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के लिए भी आदर्श उदाहरण बन गया है विकास।

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