NRC सूची, लाखों अपने ही देश में बन गए बेगाने, जदयू-बीजेपी रिश्तों की खटास सामने आई, बीजेपी के अपने भी उठा रहे उंगली

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''एनआरसी की फाइनल सूची, जिसने लाखों लोगों को अपने ही देश में विदेशी बना दिया है, जारी होने के बाद एक बार फिर जदयू बीजेपी रिश्तों की खटास सामने आ गई है, वहीं बीजेपी के अपने भी इस पर उंगली उठा रहे हैं.''

असम में शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच एनआरसी सूची जारी कर दी गई, तीन करोड़, 11 लाख 21 हजार चार लोगों को सूची में जगह दी गई है, जबकि 19 लाख से ज्यादा लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया है. जदयू ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है, वहीं असम सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस सूची को दोषपूर्ण बताया है, साथ ही कहा है कि इस पर पुर्नमूल्यांकन हो. 

जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने ट्विटर पर लिखा है, एनआरसी की फाइनल सूची ने लाखों लोगों को अपने ही देश में विदेशी बना दिया है, जब राजनीतिक दिखावे और भाषण कला को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जटिल मुद्दों को बिना रणनीति और व्यवस्थागत चुनौतियों पर बिना ध्यान दिये बिना गलती से एक समाधान के रुप में ले लिया जाता है, तो लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है. 

उल्लेखनीय है भले जदयू बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए में शामिल हो, लेकिन वो तीन तलाक से लेकर राम मंदिर मुद्दे पर बीजेपी का साथ नहीं दे रही है, पिछले दिनों तीन तलाक और ऑर्टिकल 370 पर नीतीश की पार्टी ने बहस और वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था, वोटिंग के समय जदयू के सांसद वाकआउट कर गये थे।

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एनआरसी सूची पर कहा है कि इसने उन सभी को उजागर कर दिया, जो इसे लेकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. 

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