कलई मत खोलो, नमक-रोटी खाते बच्चों का वीडियो दिखाया, अब योगी जी जेल की हवा खिलाएंगे


'खायेंगे नमक-रोटी, करेंगे योगा-पीटी' यह जुमला पिछले एक सप्ताह से उत्तर प्रदेश के जन जन की जुबान पर है। दरअसल, हुआ यह था कि एक दिन पहले ही प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के सभी स्कूलों और मदरसो में फरमान जारी किया था कि वहां पीटी के साथ ही योगा करना अनिवार्य होगा। इसके अगले दिन ही मिर्जापुर के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को मिड-डे मिल के नाम पर उनके साथ हो रही धोखाधड़ी का मामला सामने आ गया।




आकाश नागर 

क स्थानीय पत्रकार ने एक वीडियो जारी करके यह सच दिखा दिया कि सरकारी स्कूल में कैसे बच्चों को नमक रोटी खिलाई जाती है, जबकि दावे किए जाते हैं उन्हें पोष्टिक आहार देने के। वीडियो के वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की खूब भद्द पिटी थी। यहाँ तक कि खुद मुख्यमंत्री योगी को इस मामले में सख्त रुख अपनाना पड़ा था। उन्होने मामले की जाँच के भी आदेश दिये। लेकिन जाँच के नाम पर शिक्षा विभाग ने उस पत्रकार और फोटोग्राफर के साथ ही ग्राम प्रधान के खिलाफ ही मामला दर्ज करा दिया है, जिन्होंने वीडियो जारी करने की ज़ुर्रत की थी।

फलस्वरुप जमालपुर के सियुर प्राथमिक विद्यालय में बच्चो को मिड डे मील की जगह नमक रोटी खिलाये जाने के मामले में बेसिक शिक्षा विभाग कि तहरीर पर अहरौरा थाने में दो लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 186,193,120B,420 के तहत स्कूल में बच्चों का वीडियो बनाने वाले स्थानीय पत्रकार पवन जायसवाल और गांव के राजकुमार पाल पर साजिश करने और गलत साक्ष्य बना कर वीडियो वायरल करने और छवि खराब करने को लेकर मामला दर्ज किया है।

याद रहे कि 22 अगस्त को प्राथमिक विद्यालय सिऊर में सोशल मीडिया पर मिड डे मील में बच्चों को नमक-रोटी खिलाने का वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हुआ था। यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था। पूरे मामले में किरकिरी होते देख योगी सरकार ने गंभीरता से लिया।

इस मामले में तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण तिवारी, इलाके के ए बीएसए और न्याय पंचायत सामन्वक पर कार्रवाई की गयी थी। बीएसए का ट्रांसफर इलाहाबाद डायट में कर दिया गया। वहीं अन्य अध्यापको को निलंबित कर दिया गया है।

जिला प्रशासन का आरोप है कि जांच में पाया गया कि वायरल विडियो एक साजिश के तहत बनाया गया था। अधिकारियों की जांच में यह तथ्य सामने आया कि विद्यालय में प्रतिदिन मीनू के अनुसार ही बच्चों को भोजन दिया जाता था, लेकिन उस दिन साजिश के तहत भोजन में बच्चों को नमक-रोटी वितरित किया गया। इससे शिक्षा विभाग और सरकार की छवि प्रभवित हुई है।

फिलहाल अभी पूरे प्रकरण में और भी तथ्य आने बाकी है। मगर कई सवाल अब भी उठ रहे हैं कि अगर पूरा मामला कूट रचित था तो अधिकारियों ने जांच के दौरान क्यो कबूल किया कि वहां पर एक दिन पहले नमक चावल खिचड़ी बांटा गया था। आखिर बच्चों के दावों का क्या जब बच्चों ने स्वीकार किया कि उन्हें नमक और रोटी तो एक दिन नमक खिचड़ी मिली थी।

बता दें कि नमक-रोटी प्रकरण से प्रदेश शासन एवं शिक्षा विभाग की पूरे देश में किरकिरी हुई थी और मिड डे मील की व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े हो गए थे।
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