सहायक प्रोफेसर भर्ती मामले में पीएससी सचिव को अवमानना नोटिस


जबलपुर/ 30 अगस्त / सिद्धार्थ पाण्डेय / हाईकोर्ट द्वारा जारी किये गये आदेश के बावजूद भी नयी संशोधित सूची तैयार किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस जे के माहेश्वरी तथा जस्टिस अंजुली पालो की युगलपीठ ने गुरूवार को पीएससी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। युगलपीठ ने सरकार को जवाब पेष करने की मोहलत प्रदान करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।

डॉ. अमृता द्विवेदी की तरफ से दायर की गयी अवमानना याचिका में कहा गया था कि सामान्य प्रशासन विभाग के नोटिफिकेशन के बावजूद भी अनारक्षित महिला वर्ग के लिए निर्धारित सीट का आवंटन आरक्षित वर्ग की महिला को कर दिया गया था, जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गयी थी। जिसमें कहा गया था कि सहायक प्रोफेसर की भर्ती के लिए पीएससी ने 25 वर्ष बाद आवेदन आमंत्रित किये थे। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा वर्ष 1997 में जारी नोटिफिकेशन के अनुसार जिस वर्ग के लिए जितनी सीट निर्धारित है, उसमें से 30 प्रतिशत कोटा महिलाओं का होगा। अनारक्षित वर्ग के लिए निर्धारित महिला की सीट पर आरक्षित वर्ग की महिलाओं को नहीं शामिल किया जायेगा। 

याचिका में कहा गया था वर्ष 2017 में कुल 3422 सहायक प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन आमंत्रित किये गये थे। जिसमे से 1090 पद अनारक्षित वर्ग के लिए,एससी वर्ग के 535,एसटी वर्ग के लिए 969 तथा ओवीसी वर्ग के लिए 828 पद निर्धारित थे। सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित महिलाओं की श्रेणी में आरक्षित वर्ग की महिलाओं को शामिल किया गया है,जो नियम विरूध्द है। याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने नई संषोधित सूची नियम अनुसार तैयार करने के निर्देष दिये थे।

अवमानना याचिका में उच्च षिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव हरिरंजन राव तथा एमपी पीएससी की सचिव रेणु पंत को अनावेदक बनाया गया था। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से अधिवक्ता प्रवीण दूबे उपस्थित होकर बताया कि संशोधित सूची तैयार करने का कार्य जारी है। जिसके बाद युगलपीठ ने सरकार को जवाब पेश करने के लिए समय प्रदान करते हुए पीएससी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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