घर में आएंगे इको फ्रेंडली,गणेश तैयारी स्टार्ट, फैमली में मिट्टी के गणेश की खासियत पर चर्चा शुरू


जल,जंगल और जमीन को बचाने के लिए जागरूक हो चुके लोग अब कुछ वर्षो से गणेश पूजा और  दुर्गा पूजा के लिए मिट्टी की प्रतिमाओ को महत्व देने लगे है वे नही चाहते है कि वे कोई ऐसा काम करे जिसमें प्रकृति को नुकसान हो. इसलिए गणेश स्थापना की तैयारी हर साल बढ़ चढ़कर भाग लेने वाली फैमली इस बार भी मिट्टी की मूर्ति स्थापना के साथ इससे होने वाले फायदों के बारे में दूसरो को बताना शुरू कर चुके है.



छिंदवाड़ा से राजकुमार सोनी पत्रकार 

मोहखेड/छिंदवाड़ा जल, जंगल, जमीन ये सभी हमें प्राण वायु देते है. इनका न रहना हमारे जीवन के लिए खतरा है. हम सभी का कर्तव्य है की इनकी रक्षा करे. इन्हें प्रदुषण से मुक्त रखे.बात चाहे गणेश पूजा की हो या दुर्गा पूजा की वर्षो से यह परंपरा चली आ रही है जिसमें मिट्टी के गणेश एंव दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना करते है फिर उनका जल में विसर्जन कर दिया जाता है. लेकिन कुछ वर्षो से मिट्टी की मूर्ति की बजाय प्लास्टर आफ पेरिस की प्रतिमाएं बनने लगी साथ हि भारी मात्रा में इसका  नदियों  और तलाबो में किया जाने लगा है जिससे जल तो प्रदूषित हो रहा है. 

इन मूर्तियों की खास बात
खासकर यूथ में इको फ्रेंडली मूर्तियों की डिमांड जादा रहती है. ये मूर्तियां मिट्टी की मदद से बनाई जाती है.इन मूर्तियों की खास बात यह होती है कि इन मूर्तियां को पानी मे प्रभावित करते ही ये मूर्तियां आसानी से घुल जाती है.इनमें नेचुरल कलर किया जाता है,जिससे पर्यावरण को नुकसान भी नही पहुचता है.

इको फ्रेंडली का चलन
बदलते दौर में इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा का चलन देखा जा रहा है. लोग ऐसी मूर्तियां लेना पंसद कर रहे है जिनसे पर्यावरण को नुकसान नही पहुचे. बाजार में लोगो की पंसद को देखते हुए अलग-अलग प्रकार की गणेश मूर्तियां दिखाई दे रही है. 

न हो प्रकृति को नुकसान
जरूरी हो रहा है कि ऐसी पहल हो जिससे प्रकृति को कोई नुकसान न पहुचे. 

अब जरूरत है ऐसे त्यौहारो को इकोफ्रेंडली रूप में सेलिब्रेट करने की. इस बार गणेश चतुर्थी में जहा भगवान गणेश के भक्त मिट्टी के गणेश जी की स्थापना करेंगे वही उनका संकल्प है की सभी को ईकोफ्रेंडली गणेश उत्सव मनाने की सलाह भी देंगे. 

आकार ले रही प्रतिमाएं
गणेश चतुर्थी को देखते हुए कलाकारों ने भारी मात्रा में मिट्टी की मूर्तियों को तैयार करने में लगे हुए है.प्लास्टर आफ पेरिस में प्रतिबंध और मिट्टी की मूर्तियों को बढ़ावा देने क लिए यहा ईको तरीके से प्रतिमाओ आकार दिया जा रहा है. 

यहां कलाकारो का कहना है कि मिट्टी व अन्य चीजो से बनी मूर्तियो की काफी डिमांड रहती है. इन मूर्तियों की कीमत इनके आकार व इनमें युज के लिए जाने वाले मटेरियल पर डिपेंड करती है. 


इनका कहना है 
पहले की अपेक्षा अब भारी संख्या में गणेश प्रतिमाओ की स्थापना की जा रही है. इसका विसर्जन भी नदियो और तलाबो में किया जाता है जिससे प्रदूषण होता है. अब हमें प्रकृति के संरक्षण को देखते हुए इन उत्सव को सेलिब्रेट करना होगा.
- ओमप्रकाश चौधरी , रोजगार सहायक, सारंगबिहरी


प्लास्टर आफ पेरिस की प्रतिमाएं पानी में नही घुलती है. इसमें किए गए रंग रसायनिक होते है जिससे जलीय जीवों के जीवन का खतरा होता है. पानी भी विषेला हो जाता है. हमे अब इको फ्रेंडली तरीके से यह उत्सव मनाएंगे.

- मुकेश उर्फ गोलू पवार, सिमरिया

अल्प वर्षा के कारण नदियां, तलाब सूख रहे है. इस समय हमें प्रकृति का संरक्षण करने और उनकी देखभाल करने की जरूरत है.प्रदूषण आज सबसे बड़ी समस्या है. बारिश का कम होना प्रक्रति से हो रही छेडछाड का कारण है.
- महेश चौधरी, गोहजर 
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