अजय के मुकाबले दूसरा कोई काबिल नहीं, जो दूर हो रहे कार्यकर्ताओं को संभाल सके, सपा विधायक का अहम बयान


कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के लिए चल रही जद्दोजहद के बीच सरकार को सहयोग कर रही पार्टी सपा के एकमात्र छतरपुर जिले के बिजावर से विधायक राजेश शुक्ला ने कांग्रेस में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के मुकाबले कोई दूसरा प्रदेश अध्यक्ष बनने के काबिल नहीं है, कह कर राजनैतिक क्षेत्र में सनसनी फैला दी है. 

यह पहला मामला है जबकि अल्पमत सरकार के सहयोगी दल में शामिल किसी विधायक ने सीधे तौर पर अपनी पसंद तब सार्वजनिक की है, जबकि मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद अपनी पसंद के व्यक्ति को यह पद सौपने की फ़िराक में हैं. बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अजय सिंह के सरकारी आवास सी-19 में जुटे करीब 25 कांग्रेसी विधायकों के साथ हुई बैठक में न केवल यह शामिल हुए, बल्कि खुलकर अजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का समर्थन भी किया. हालांकि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के विषय को कांग्रेस का अंदरूनी मसला बताया, लेकिन मीडिया से यह कहने में भी नहीं चूके कि इनके मुकाबले कांग्रेस में दूसरा कोई भी काबिल नहीं है, जो कांग्रेस से दूर हो रहे कार्यकर्ताओं को संभाल सके.

बताया जाता है कि जुटे विधायकों ने अपनी भावनाओं से अजय सिंह राहुल को अवगत कराते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने मजबूत दावेदारी रखने का अनुरोध भी किया है. इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस की मजबूती का हवाला देते हुए समर्थक अजय सिंह को मप्र कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए सबसे उपयुक्त बता रहे हैं. यही कारण है कि कल बुधवार को विधायक आलोक चतुर्वेदी, नीलांशु चतुर्वेदी, केपी सिंह कक्का जू, देवेंद्र पटेल, सुनीता पटेल, कलावती भूरिया, फुन्देलाल सिंह मार्को, विशाल पटेल और मनोज चावला, झूमा सोलंकी, पंचीलाल मीणा, विनय सक्सेना, गोपाल सिंह चौहान और विक्रम सिंह नातीराजा सहित अन्य विधायक निवास पर न केवल जुटे, बल्कि जनभावनाओं से भी अवगत कराया. 

अब तलाशे जा रहे हैं बैठक के मायने 
अजय सिंह ने भले ही दावेदारी से खुद को दूर बताया है, लेकिन कांग्रेस का ही एक वर्ग अब बंगले पर हुई चर्चा के मायने निकालने में जुट गया है. पहला खुद की दावेदारी को लेकर है, तो दूसरा किसी धड़े के विरोध को लेकर है, जबकि कुछ इसे प्रेशर पॉलिटिक्स से जोड़कर देख रहे हैं. जबकि बैठक के बाद मीडिया से चर्चा में अजय सिंह ने हालांकि इस बात से इंकार किया कि, वह इस पद की दौड़ में शामिल हैं. उनका स्पष्ट कहना था कि इस संबंध में अंतिम निर्णय का अधिकार कांग्रेस आलाकमान के पास सुरक्षित है.

गोविंद के साथ अजय से मिले थे दिग्विजय
इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ गोविंद सिंह के साथ अजय सिंह राहुल से बंद कमरे में चर्चा कर चुके हैं. यह बात दूसरी है कि इसके बाद दूसरे समर्थकों ने खुद दिग्विजय सिंह को अगला प्रदेश अध्यक्ष बता दिया, लेकिन संगठन में महत्व, अनुभव और राजनीतिक कद को देखते हुए, कांग्रेस के लोग ही यह मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि दिग्विजय इसे सहर्ष स्वीकार करेंगे. 

शिवराज का अनुसरण कर रहे कमलनाथ 
इधर नए प्रदेश अध्यक्ष के मामले में कमलनाथ भाजपा की तर्ज पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का अनुशरण करते नजर आ रहे हैं. इसीलिए वह किसी दूसरे खेमे के व्यक्ति को मौका देने के बजाय अपनी पसंद के व्यक्ति को अध्यक्ष पर बिठाना चाहते हैं. यह ठीक उसी तरह है जिस तरह मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह ने नंदकुमार सिंह चौहान और बाद में राकेश सिंह की ताजपोशी कराने में सफल हुए थे. यही वजह है कि लगातार कमलनाथ के खास मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, गृहमंत्री बाला बच्चन को रेस में बनाये हुए हैं, जबकि वह मंत्री पद छोडऩे के लिए तैयार नहीं हैं. 

कमोबेश यही स्थिति उमंग सिंघार और जीतू पटवारी के मामले में भी नजर आ रही है. इनमें जीतू को छोड़कर बाला और उमंग कमलनाथ के खास माने जाते हैं और कमलनाथ समर्थक पहले ही यह बात साफ कर चुके हैं कि पीसीसी चीफ वही चेहरा होगा, जो मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ बेहतर तालमेल के साथ पार्टी को चला सके. इसके लिए कमलनाथ के करीबी बाला बच्चन का नाम सबसे आगे बढ़ाया गया है.

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