बालकृष्ण को हृदयघात होने पर पतंजलि पर विश्वास क्यों नहीं?




रामदेव ने बालकृष्ण को आज एम्स में एडमिट क्यों किया ? जो रामदेव और बालकृष्ण देश और दुनिया के मरीजों को योग भगाए रोग का सन्देश देते नहीं अघाते है उन्होंने अपनी बीमारी को योग के जरिए ठीक क्यों नहीं कर लिया?




आकाश नागर 

ह 16 साल पहले की बात है। बालकृष्ण जब पहली बार हरिद्वार में आचार्य कर्मवीर को मिले थे तो तब वह उनके एक मित्र के घर में खाना बनाते थे। कर्मवीर जी ने खाना खाया तो उन्हें खाना बहुत स्वादिष्ट लगा। बाबा कर्मवीर ने अपने मित्र से कहा की जिस बच्ची ने खाना बनाया है उसे बुलाओ। बुलाया तो वह बच्ची नहीं बल्कि बालकृष्ण था। 

कर्मवीर जी ने कहा कि तुम खाना बहुत अच्छा बनाते हो। तब बालकृष्ण ने कहा कि बाबा जी में सिर्फ खाना ही अच्छा नहीं बनाता बल्कि आयुर्वेदिक दवाइयां के बारे में भी बहुत अच्छा जानता हूँ। बाबा कर्मवीर ने बालकृष्ण को साथ ले लिया। उसके बाद एक दिन हरिद्वार की गलियों में कर्मवीर बाबा को साईकिल पर एक गेरुआधारी व्यक्ति भजन गाते हुए मिला जो बाद में रामदेव के नाम से जाना गया । 



बाबा कर्मवीर ने उसको भी साथ ले लिया। बाद में बाबा कर्मवीर ने दोनों को साथ लेकर एक योग संस्था का निर्माण किया और जगह जगह योग सीखने के कैंप लगाने लगे। कर्मवीर क्योकि योगा में डबल एम ए किए हुए थे। उन्होंने मंच पर खुद योग करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही रामदेव भजन अच्छा गाते थे तो उन्हें माईक देकर मंच संचालन का जिम्मा दिया, जबकि बालकृष्ण को आयुर्वेदिक दवाइयों के बारे में योग सीखने आने वालो को जानकारी देने का काम सौपा। बाद में तीनो ने मिलकर पतंजलि की स्थापना की और उसके बाद जो हुआ आप सभी जानते है।

बाबा कर्मवीर को एक साजिस के तहत पतंजलि से निकलवाया गया। रामदेव और बालकृष्ण बाद में पतंजलि के सिरमौर बन गए। आज वही बालकृष्ण बीमार है। रामदेव एक वीडियो जारी कर कह रहे हैं कि बालकृष्ण को  फूड प्वाईजनिंग हुआ है। हम चाहेंगे कि भगवान करे वह जल्दी सही सलामत हो जाएँ, लेकिन मेरे जेहन में एक सवाल बार बार आ रहा है कि रामदेव ने बालकृष्ण को आज एम्स में एडमिट क्यों किया? जो रामदेव और बालकृष्ण देश और दुनिया के मरीजों को योग भगाए रोग का सन्देश देते नहीं अघाते हैं, उन्होंने अपनी बीमारी को योग के जरिए ठीक क्यों नहीं कर लिया? 


सबसे बड़ी बात यह है कि जो व्यक्ति हरिद्वार स्थित जिस पतंजलि हॉस्पिटल में रोजाना हजारो मरीजों को एडमिट कर उन्हें ठीक करने का दावा करते है और रोजाना पतंजलि की दवा बेचकर लोगो की जिंदगी बचाने के बड़े बड़े एड अखबारों और टीवी चेनलो में देते है, वह आज एम्स में एडमिट क्यों हुए? 

क्या उन्हें अपने पतंजलि हॉस्पिटल की चिकित्सा प्रणाली पर यकीन नहीं है? क्या योग में रोग भागने का जादू नहीं है? या पतंजलि की वह दवाईया बेअसर है जिनके सेवन से हृद्य रोग और कैंसर जैसे असाध्य बीमारियों का इलाज करने का प्रचार किया जाता है?

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कोई है जो मरना चाहता है बालकृष्ण को? 





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3 comments:

  1. I know a doctor who was treating swine flu patients and he also died with swine flu because he could not get time to treat himself,likewise same happened with balkrishan acharya.it doesnt matter who was he initially. Akshay kumar hero was also a chef in a hotel bt became a superstar. I am not a fan of patanjali or ram dev.but i have seen lots of people getting good health with his pranayam and ayurvedic medicines

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  2. भक्तों के लिये रामबाण है ।इनकी औषधियां ।खुद कैसे खायें ।कयोंकि कैमिकल डालने खुद ही है । इसलिए नेहरू खानदान (काग्रेस)के शासन में बना एम्स पर ही विश्वास करना मजबूरी है ।बाबा रामदेव और बालकृष्ण की ?

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  3. Bharat ek loktantrik desh hai sabko kehne ka hak hai
    Parantu kya congress dwara bane hue aims me sabhi mareez theek hote hain kuch bhagwan ko pyare bhi hote hain
    To baat thi aurvedic dwaon ki to yeh bharat ki pracheen chikitsa pranali hai OR yog dwara aap khush bhi reh sakte hain swasth bhi OR kafi bimarion ke na hone ki guarantee bhi le sakte hain.
    Har saal hajaron videshi is yog va Yoga ko seekhne ke liye Bharat aate hain

    To kripya nagar ji apne desh par abhimaan karen ye kisi nehru congress ne nahi di pracheen sadhuon ne hame virasat me dia hai
    Aayurved naam se ek VED hai

    Thanks
    Pankaj Bhati

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