72 सालों का इंतजार ख़त्म, 'तिरंगा' लहराएगा कश्मीर में


पिछले दिनों में जब बड़ी संख्या में सेना के जवानों को कश्मीर में भेजा गया तब से ही ये आशंका थी कि कश्मीर की घाटी में कुछ बहुत बड़ा होने वाला है. किंतु राजनीति के प्रखर विद्वानों को भी इस बात की भनक तक न थी कि सरकार धारा 370 को इस तरह एक झटके में खत्म कर देगी. कश्मीर से धारा 370 को हटा उसे एक केंद्र शासित राज्य राज्य का दर्जा देने और लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित राज्य घोषित करने का यह फैसला वाकई एक ऐतिहासिक फैसला है, जिसका स्वागत देश के लाखों करोड़ों लोग कर रहे हैं.




भवानी प्रताप सिंह ठाकुर

ल सुबह के पहले शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि मोदी सरकार एक ऐतिहासिक फैसला लेने जा रही है. एक ऐसा फैसला जो इतिहास बदल देने वाला होगा, जो भूगोल बदल लेने वाला होगा. वह फैसला जिसका इंतजार इस देश की जनता कर रही थी, कश्मीर की जनता कर रही थी. वह फैसला जिसके लिए लाखों-करोड़ों लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को एक प्रचंड बहुमत के साथ विजयी बनाया था, लेकिन अब वह फैसला लिया जा चुका है और अब धारा 370 के साथ ही खत्म हो गया वो इंतजार जो इस देश की जनता पिछले 72 सालों से कर रही थी, इंतजार कश्मीर की धरती पर तिरंगा लहराते देखने का, इंतजार एक निशान- एक विधान- एक प्रधान के सपने को सच होता देखने का, इंतजार कश्मीर की धरती पर एक ऐतिहासिक फैसले और अविस्मरणीय फैसले का जो कश्मीर को हिंदुस्तान के साथ सदा के लिए जोड़ देने वाला हो.

पिछले दिनों में जब बड़ी संख्या में सेना के जवानों को कश्मीर में भेजा गया तब से ही ये आशंका थी कि कश्मीर की घाटी में कुछ बहुत बड़ा होने वाला है. किंतु राजनीति के प्रखर विद्वानों को भी इस बात की भनक तक न थी कि सरकार धारा 370 को इस तरह एक झटके में खत्म कर देगी. कश्मीर से धारा 370 को हटा उसे एक केंद्र शासित राज्य राज्य का दर्जा देने और लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित राज्य घोषित करने का यह फैसला वाकई एक ऐतिहासिक फैसला है, जिसका स्वागत देश के लाखों करोड़ों लोग कर रहे हैं.

लेकिन सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले पर कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल विरोध भी जता रहे हैं, किंतु शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि आम आदमी पार्टी और बसपा जैसी पार्टियां जो कि भाजपा की धुर विरोधी कहलाती हैं, यह भी इस बिल पर भाजपा का समर्थन कर देंगी. 
वह जुबान जो कल तक हाथ काटने और हाथ जलने की धमकीयाँ दे रहीं थी. आज उनके शब्दों में वह उदासी और वो निराशा झलक आई जिसने साफ कर दिया कि कश्मीर से धारा 370 का हटना इन राजनीतिक परिवारों की सियासी धरा खिसकने जैसा है. इस दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन बताने वाले राजनैतिक चेहरे, वास्तव में यह काला दिन भारतीय इतिहास या भारतीय लोकतंत्र में नहीं अपितु इनके राजनीतिक जीवन का काला दिन है. वह काला दिन जिसके बाद सारे काले कारनामे समाप्त होने वाले हैं.

तमाम विपक्षी दल अनेक कारण देकर कश्मीर से धारा 370 हटाने का विरोध कर रहे हैं किंतु किसी भी राजनीतिक दल ने इस विषय पर संवैधानिक बहस नहीं की क्यों? गृह मंत्री अमित शाह ने देश की संसद में साफ कर दिया कि धारा 370 कश्मीर के भारत में विलय अर्थात 1947 के 2 साल बाद 1949 में आई है और यह एक अस्थाई धारा है. सरकार को इसे हटाने का अधिकार है. अमित शाह ने संसद में यह भी कहा की धारा 370 ने कश्मीर को भारत के साथ एक नहीं होने दिया. 

विपक्ष के हंगामे के बाद भी  BJD, AIADMK, YSRCP, SS, BSP, AAP, TDP, जैसे अन्य राजनीतिक दल इस बिल पर सरकार के साथ हैं, वही एनडीए का घटक जेडीयू इस बिल पर सरकार के साथ खड़ा नहीं दिखाई देता है. कांग्रेस टीडीपी टीएमसी जैसे अन्य राजनीतिक दल भी इस बिल को लेकर सरकार का विरोध कर रहे हैं. 

फैसला ऐतिहासिक है, किंतु इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही कई चुनौतियां भी सामने आने वाली है. इस फैसले के बाद घाटी में शांति व्यवस्था बनाए रखना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वे लोग जब तक घाटी में उन्माद मचाते रहे हैं. वे इस सब के बाद घाटी में शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश अवश्य करेंगे. सरकार और सेना भी इसके लिए पूरी तरह से तैयार दिखाई पड़ती है. घाटी में धारा 144 लागू है, घाटी में मोबाइल एवं इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद है. घाटी में भारी मात्रा में सैन्य बल के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार 'अजीत डोभाल' खुद घाटी में सुरक्षा व्यवस्था का मोर्चा संभाले हुए हैं. 

इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब इंतजार उस पल का है, जब कश्मीर की धरती पर तिरंगा झंडा लहराएगा. देखना यह भी दिलचस्प रहेगा कि जब सरकार ने अपने नए कार्यकाल के इतने अल्प समय में ही धारा 370 और तीन तलाक जैसे बड़े मुद्दों पर फैसले ले लिए हैं तो आने वाले दिनों में मोदी सरकार और क्या कुछ करने वाली है?

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