मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का असुरक्षा बोध, संडे पोस्ट को सीएम कार्यालय से पोस्ट हटाने की धमकी





सत्ता जहां अहंकार को जन्म देती है वहीं असुरक्षा बोध का भी कारण बनती है। उत्तराखण्ड के मौजूदा मुख्यमंत्री पर हावी सत्ता के अहंकार को तब पूरे मुल्क ने देखा जब एक निरीह स्कूल शिक्षिका को उन्होंने न केवल अपने जनता दरबार में अपमानित किया, बल्कि महिला की अशिष्ट भाषा से नाराज हो उसे जेल तक भिजवा डाला। सत्ता शीर्ष पर बैठे त्रिवेंद्र सिंह रावत के असुरक्षा बोध को राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी की बढ़ती लोकप्रियता और सक्रियता से समझा जा सकता है। बलूनी की बाबत 'दि संडे पोस्ट' की एक फेसबुक पोस्ट से बौखलाए सीएम के शुभचिंतकों ने धमकी तक दे डाली कि यदि फेसबुक पोस्ट नहीं हटाई तो अंजाम बुरा होगा। सीएम के 'बलूनी फोबिया' का इस धमकी के पीछे होना साफ नजर आता है..



अपूर्व जोशी 

त्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पृष्ठभूमि से हैं। 1979 में संघ से 19 बरस की आयु में जुड़े त्रिवेंद्र रावत संघ के क्षेत्र प्रचारक भी रहे हैं। 2002 में पहली बार विधायक बने तो 2007 में भाजपा सरकार में मंत्री। जब भाजपा में परिवर्तन का दौर शुरू हुआ यानी टीम आडवाणी के स्थान पर टीम अमित शाह मैदान में उतारी गई तो त्रिवेंद्र रावत को झारखंड का प्रभारी बनाया गया। इस दौर में उनकी पार्टी अध्यक्ष संग नजदीकी बढ़ी जिसका लाभ 2017 में उन्हें तब मिला जब सीएम पद के लिए उनके और प्रकाश पंत के मध्य पेंच फंस गया। माना जाता है कि पार्टी प्रमुख अमित शाह संग उनकी नजदीकी ऐसे में काम आई और वे सीएम बना दिए गए। त्रिवेंद्र सिंह रावत, वर्तमान मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड, का यह परिचय इतना तो कम से कम साबित करता है कि वे पार्टी प्रेसिडेंट की गुड बुक्स में रहे हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत इन उपलब्धियों के बावजूद स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसका प्रमाण है 'हल्द्वानी ऑन लाइन' में 31 मई 2019 को पोस्ट एक समाचार जिसे 'दि संडे पोस्ट' के रोविंग एसोसिएट एडिटर आकाश नागर ने लिखा था। इस पोस्ट का सार इतना भर है कि राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी की कार्यशैली से प्रभावित भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उन्हें उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बनाने पर विचार कर रहे हैं। 

'दि संडे पोस्ट' पूर्व में भी कई बार सत्ता के गलियारों में चल रही ऐसी कयासबाजियों पर लिखता रहा है। इनमें से कई सही भी साबित हुईं हैं। खण्डूड़ी जब उत्तराखण्ड के सीएम थे तब 'दि संडे पोस्ट' ने ही उनको हटाए जाने की खबर सबसे पहले दी थी। इसी प्रकार निशंक के हटने का समाचार भी इसी अखबार ने सबसे पहले प्रकाशित किया था। ये दोनों खबरें सही साबित हुई। विजय बहुगुणा के हटने और हरीश रावत को सीएम बनाए जाने की खबर भी 'दि संडे पोस्ट' ने ही जनता तक सबसे पहले पहुंचाई। इसी प्रकार जब तमाम कांग्रेसी 2017 में हरीश रावत के नेतृत्व में पार्टी को मिली करारी हार के बाद हरीश रावत को 'फिनिस्ड फोर्स' करार देने लगे थे, 'दि संडे पोस्ट' ने कांग्रेस महासचिव बनाए जाने का समाचार दे दिया था। ठीक इसी प्रकार इन दिनों दिल्ली के सत्ता गलियारों में बड़ी चर्चा है कि राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी को त्रिवेंद्र रावत के स्थान पर राज्य की कमान सौंपी जा सकती है। आकाश नागर की इस सामान्य पोस्ट से देहरादून के सत्ता शीर्ष पर बैठे कुछ ज्यादा ही विचलित गए हैं हो। 

'हल्द्वानी ऑन लाइन' के संस्थापक अमित खोलिया हैं। उन्होंने 2011 में इस पोर्टल की शुरूआत की थी। मात्र चंद बरसों में इस फेसबुक पेज ने लोकप्रियता का कीर्तिमान स्थापित कर डाला है। जाहिर है ऐसे में आकाश नागर की पोस्ट से सीएम के करीबी खासे नाराज हो उठे हैं। अपने को सीएम के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट का ममेरा भाई बताते हुए किन्हीं सुलभ जोशी ने 9719018796 नंबर से 'दि संडे पोस्ट' के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली को फोन करा। वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली से इस सुलभ जोशी ने 'हल्द्वानी ऑन लाइन' से आकाश नागर की पोस्ट तुरंत हटाने की मांग की। साथ ही यह धमकी भी दे डाली कि यदि यह पोस्ट नहीं हटाई गई तो आकाश नागर मुसीबत में पड़ जाएगा। चूंकि अभी कुछ अर्सा पहले ही हमारे प्रतिनिधि मनोज बोरा को हल्द्वानी में गोली मारी गई है और हमारे राज्य प्रभारी दिव्य सिंह रावत के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज करा उन्हें प्रताड़ित करने का काम जोर-शोर से चल रहा है, इसलिए दुष्यंत मैनाली ने चिंतित हो हमें सूचित किया।

 आकाश नागर ने सुलभ जोशी से वार्ता की तो कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। इस व्यक्ति सुलभ जोशी ने स्वयं को सीएम के मीडिया एडवाइजर रमेश भट्ट का ममेरा भाई बताया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें यह समाचार 'हल्द्वानी ऑन लाइन' से हटाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से कहा गया है। यह भी दावा किया कि रमेश भट्ट, मीडिया सलाहकार सीएम ने भी उन्हें इस पोस्ट को हटाने के लिए प्रयास करने को कहा (देखें बातचीत का बॉक्स)। हैरानी की, भयभीत करने की बात यह कि इन साहब ने यह भी स्वीकार किया कि दुष्यंत मैनानी संग अपनी बातचीत में उन्होंने धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया।

बलूनी से सीएम क्यों त्रस्त हैं, इसे समझा जाना जरूरी है। पहली बात बलूनी की राज्य में बढ़ रही लोकप्रियता है। शांत स्वभाव के बलूनी ने राज्यसभा सदस्य बनने के साथ ही देहरादून से हल्द्वानी के लिए रेलगाड़ी, केंद्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) की बटालियन की उत्तराखण्ड में तैनाती, सेना के अस्पतालों में उत्तराखण्ड की सिविलियन जनता के ईलाज की व्यवस्था आदि को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया । इस सबसे जनमानस में बलूनी की लोकप्रियता में भारी इजाफा हुआ है। सीएम के बेचैनी का एक अन्य कारण अनिल बलूनी की पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी संग नजदीकी का होना भी है। बलूनी भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख हैं। ऐसे में उनकी उठा-बैठ भाजपा के सभी शीर्ष नेताओं संग होती है। जिस अंदाज में देहरादून जनशताब्दी को हरी झंडी दिखाते समय रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बलूनी की तारीफों के कसीदे पढ़े थे, उससे साफ है कि बलूनी का कद उत्तराखण्ड भाजपा में तेजी से बढ़ा है। सीएम त्रिवेंद्र इसी के चलते बलूनी फोबिया के शिकार हो चले हैं।

'पोस्ट हटा लो वरना ...'
दूरभाष पर सुलभ जोशी से आकाश नागर की बातचीत
आकाश नागर: सुलभ जोशी जी नमस्कार, मैं प्रेस रिपोर्टर आकाश नागर बोल रहा हूं।
सुलभ जोशी: कहिए आकाश नागर जी।
आकाश नागर: दुष्यतं मैनाली जी का फोन आया था।
सुलभ जोशी: हां, आया होगा, आपने कोई पोस्ट डाली थी, बलूनी वाली। वो मेरे ख्याल से बिना उसकी है।
आकाश नागर: बिना उसकी क्या?
सुलभ जोशी: उस पोस्ट का कोई आधार नहीं है। सीएम ऑफिस से फोन आया था मेरे पास।
आकाश नागर: सीएम ऑफिस से फोन आया आपके पास।
सुलभ जोशी: जी हां।
आकाश नागर: किस लिए?
सुलभ जोशी: पोस्ट को हटाने के लिए।
आकाश नागर: पोस्ट को हटाने के लिए।
सुलभ जोशी: जी ... जी ... जी ...!
आकाश नागर: किसने किया आपसे फोन।
सुलभ जोशी: बता तो रहा हूं सीएम ऑफिस से आया था।
आकाश नागर: अच्छा सीएम ऑफिस से फोन आया था।
आकाश नागर: सीएम साहब को या सीएम ऑफिस को क्या प्रॉब्लम है?
सुलभ जोशी: आप उस पोस्ट को पढ़िएगा, देखिएगा उस पोस्ट में क्या लिखा है।
आकाश नागर: क्या लिखा है उसमें।
सुलभ जोशी: यही मैं आपसे पूछ रहा हूं। आपके पास कोई इंटेलिजेंस रिपोर्ट है।
आकाश नागर: नहीं वो तो हम पत्रकार लोग होते हैं, हमारे पास सूत्र होते हैं, मैंने लिखा है कि सूत्रों के हवाले से, पार्टी सूत्रों के हवाले से।
सुलभ जोशी: हां उसी वजह से। ऐसा भी कहीं होना चाहिए कि किसी की छवि धूमिल हो रही हो उस वजह से।
आकाश नागर: छवि क्या धूमिल हो रही है इससे।
सुलभ जोशी: आप रमेश भट्ट जी को जानते हैं।
आकाश नागर: रमेश भट्ट जी मेरे दोस्त हैं, वह पहले पत्रकार हैं और अब मुख्यमंत्री जी के मीडिया सलाहकार हैं।
सुलभ जोशी: वो मेरे बड़े भ्राता हैं।
आकाश नागर: बड़े भ्राता हैं मतलब, बड़े भाई हैं आपके।
सुलभ जोशी: मेरे दादा हैं वह।
आकाश नागर: आप जोशी हैं वो भट्ट, फिर भ्राता कैसे हुए?
सुलभ जोशी: मेरे मामा के बेटा हैं वह।
आकाश नागर: अच्छा।
सुलभ जोशी: भाई का फोन मेरे पास आया था।
आकाश नागर: अच्छा, भट्ट जी का फोन आपके पास आया था कि नागर साहब से ऐसा कह दो कि इस पोस्ट को हटा दे।
सुलभ जोशी: नागर साहब से नहीं। उन्होंने ऐसा पर्टिकुलर नहीं बोला, लेकिन बोला कि यह स्टेटमेंट हटा दें।
आकाश नागर: मैंने तो इस लिए फोन किया था भाई आपको कि मेरे पास हमारे अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली का फोन आया था कि जोशी आपसे बात करना चाहते हैं। वह बड़ी आपत्तिजनक बात कह रहे थे जो आपने उनसे मेरे लिए बोली थी कि एक घंटे में इनका (नागर का) कुछ हो जाएगा। ऐसा कह रहे थे आप।
सुलभ जोशी: मैंने कहा था कि इनको दिक्कत हो जाएगी।
आकाश नागर: मतलब क्या दिक्कत हो जाएगी जी।
सुलभ जोशी: बहस आप करेंगे तो उसका उपाय कुछ है नहीं।
आकाश नागर: जोशी जी आप मेरे भाई हैं, क्योंकि रमेश भट्ट जी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। आप उनके भाई हुए तो हमारे भी भाई हुए। लेकिन आप जो कह रहे हैं ना कि दिक्कत हो जाएगी एक घंटे में।
सुलभ जोशी: आप उनसे एक बार बात कर लीजिए।
आकाश नागर: दरअसल मैं बात कर लूंगा इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन आपने जो जोशी जी यह बात कही है। 'उनको एक घंटे में दिक्कत हो जाएगी।' मैं तो सच बताऊं डर गया। मैंने सोचा यार मैं तो पत्रकार हूं। मैं तो सारे क्षेत्र में अकेला घूमता हूं।
सुलभ जोशी: आप पत्रकार हैं आपके सबसे संबंध होंगे। मेरे पास भाई साहब का फोन आया। हटाने के लिए पोस्ट। मेरा तो कुछ नहीं है।
आकाश नागर: आपका कुछ नहीं है तो जोशी जी आपने यह कैसे बोला कि एक घंटे में नागर को दिक्कत हो जाएगी। परिणाम आ जाएंगे।
सुलभ जोशी: मैंने सिम्पल सी बात बोली थी कि ऐसा न हो नागर साहब को दिक्कत हो जाए।
सुलभ जोशी: भाई साहब को लाइन पर लूं।
आकाश नागर: नहीं-नहीं मैं बात करना नहीं चाहता। बस उनसे यह बता देना कि पोस्ट नहीं हटेगी।

इस पोस्ट से है दिक्कत हटाने बनाया गया दबाब 


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