वाटरलेवल गिरने से अनुपजाऊ हो रही खेतों की भूमि, देश मेँ फेल सकती है भुखमरी, समय रहते आवश्यक कदम जरूरी



आमजन, देश से जुड़ी ज्वलंत समस्या    


अपने जीवन के बरबाद होने का क्या? जब चले जाऐँगे हम, लौट के सावन की तरह.. खेतों की भूमि वाटरलेवल के निरंतर गिरने से नमीबिहीन होकर उपजाऊ क्षमता खो बैठी, तो देश मेँ भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी, सोचिये तब क्या होगा? 





कुंवर कान्त 

खेतों की भूमि वाटरलेवल के निरंतर गिरने से नमीबिहीन होकर उपजाऊ क्षमता खो बैठी, तो देश मेँ भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी, सोचिये तब क्या होगा? ऐसे में आवश्यक है कि समय रहते कदम उठाये जाएँ. इस स्थिति पर वैज्ञानिक परिक्षण की माँग होना चाहिए. कुछ विचारणीय बिँदु इस प्रकार हैं-  



1. वर्ष 1980-90 के दशक मेँ नेताओं की नौटँकी ने विदेशी यूकेलिप्टस/ अँग्रेज़ी बबूल जैसे जलशोषक पौधे जब से विदेशो से खरीद कराकर देश के सभी ग्रामों के किसानों को बृक्षारोपण के लिए खँड विकास अधिकारी कार्यालय के माध्यम से उपलब्ध करवाकर बृक्षारोपण करवाया था, तभी से उन विदेशी बृक्षोँ द्वारा अत्यधिक जलशोषण करने से जलश्रोत के माध्यम कुआँ/तालाब/नदियाँ जल सँरक्षण की क्षमता खोने लगे हैं. 

2. कुओँ द्वारा पेयजल उपलब्ध न करा पाने के कारण जो हैँडपम्पोँ द्वारा पेयजल आपूर्ति की राह अपनाई गई, उससे पचास/साठ फिट गहरे भू-गर्भ की पर्तों से पानी निरँतर निकलने से भू-गर्भ की पर्तें इतनी खाली हो गई हैँ, कि बरसाती मूसलाधार वर्षा वाला पानी भी भू-गर्भ की खाली पर्तों मेँ समा जाने के कुआ/तालाबों को भर पाने मेँ अक्षम होने लगा है. 

3. ऐसी स्थिति में जब कृषि भूमि वाटरलेवल गिरने से नमीबिहीन हो जाने पर खेतों की उपजाऊ क्षमता खो बैठेगी, तब भूखमरी से बचने का क्या विकल्प होगा? 

उपरोक्त प्रकरण से समाजसेवियों तथा समाजसेवी सँघठनों से निवेदन है कि उपरोक्त विवरण के आलोक मेँ वैज्ञानिक परीक्षण कराने हेतु समय रहते सरकार पर दवाव बनाने की राह अपनायें.  प्रार्थना पत्र भिजवायें.

जन जागरण हेतु विचार गोष्ठियों का आयोजन करवा कर समाचार पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन कराकर अपने फर्ज की अदायगी करें. अन्यथा ...
अपने जीवन के बरबाद होने का क्या?
जब चले जाऐँगे हम, लौट के सावन की तरह..




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