आधी छोड़ पूरी को धावै, पूरी मिले न आधी पावै, इस बन्दे के साथ तो ऐसी हो गई






''आधी छोड़ पूरी को धावै, पूरी मिले न आधी पावै, इस बन्दे के साथ तो ऐसी हो गई. प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विपक्षी एकता बनाने में जुटे टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू तीसरे मोर्चे की कवायद में खुद के पीएम बनने का ख्वाब देखने लग गए थे, कि अपने राज्य पर ही ध्यान नहीं दिया. आखिर उन्हें आंध्रप्रदेश में मुख्यमंत्री पद की कुर्सी कुर्सी गंबानी पड़ गई है.''

एग्ज़िट पोल में करारी हार के बावजूद विपक्ष का कोई शख्स सबसे ज्यादा आत्मविश्वास से भरा दिख रहा था तो वह केवल चंद्रबाबू नायडू ही थे. श्री नायडू का अति-आत्मविश्वास, उत्साह और आशावादी सोच देखते ही बनती थी. मोदी विरोधी मोर्चा तैयार करने में ऐसे जुटे की आज राहुल, कल मायावती और फिर ममता.. लेकिन चक्कर लगते ही रह गए. और इधर आंध्रप्रदेश के चुनाव में अपनी ही सरकार नहीं बचा पाए. विधानसभा चुनाव में जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने उन्हें राज्य की सत्ता से ही बाहर कर दिया.

चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र के स्पेशल स्टेटस के नाम पर अपनी समझ से सबसे बड़ा सियासी दांव खेला था. पिछले साल आंध्रप्रदेश के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग करते हुए टीडीपी ने खुद को एनडीए से अलग कर लिया था. नायडू का मानना रहा कि इससे वे आंध्र की जनता में मसीहा बनकर उभरेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. विरोधी वाईएसआर कांग्रेस के जगनमोहन रेड्डी ने पद-यात्रायें करके आंध्र के दिल में जगह बना ली कि नायडू को पता ही नहीं चला. परिणाम की आज लोकसभा के साथ साथ और विधानसभा चुनाव में भी टीडीपी की करारी हार हो गई है. 




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