बयान के बाद अंतिम चरण के मतदान में BJP को फायदा होता दिख रहा, यदि ऐसा हुआ तो बढ़ेगा प्रज्ञा का कद




''भले ही पीएम मोदी नाथूराम गोंडसे पर साध्वी प्रज्ञा के बयान के बाद, उन्हें दिल से माफ़ न कर पायें, लेकिन यह सच है कि साध्वी प्रज्ञा के बयान के बाद अंतिम चरण के मतदान में बीजपी को फायदा होता दिख रहा है. यदि ऐसा हुआ तो बीजेपी में प्रज्ञा का कद बढ़ना तय है.'' 



बलभद्र मिश्रा    

सोशल मीडिया पर देखें तो अधिकाँश लोग गोंडसे के पक्ष में अपने विचार न केवल देश भक्त के रूप में पेश कर रहे हैं, बल्कि गोंडसे की पिक को प्रोफाइल पिक तक बना रहे हैं. इतना ही नहीं महात्मा गांधी को लेकर जहर उगला जा रहा है. उनके राष्ट्रपिता होने पर सवालिया निशाँ लगाए जा रहे हैं.  



कहा जा रहा है आम आदमी जनता पर, उसकी अभिवयक्ति पर कोई रोक नहीं है. आचार संहिता बड़े नेताओं पर लागू होटी है. वही नफा नुकसान देख कर अपने वक्तव्य देते हैं. किस बयान से नुकसान होता दिखता है तो वही वापिस भी लेते हैं.  

उल्लेखनीय है मध्यप्रदेश में बीजेपी प्रवक्ता अनिल सौमित्र को 'राष्ट्र पिता थे, लेकिन पाकिस्तान राष्ट्र के', बयान को लेकर पार्टी ने प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है, इसके बाबजूद वह अपने बयान पर कायम हैं. कई अन्य बीजेपी नेता भी खुलकर गोंडसे की विचारधारा का समर्थन कर रहे हैं. 



कुल मिला कर कहा जा सकता है कि भले ही पीएम मोदी नाथूराम गोंडसे पर साध्वी प्रज्ञा के बयान के बाद, उन्हें दिल से माफ़ न कर पायें, लेकिन यह सच है कि साध्वी प्रज्ञा के बयान के बाद अंतिम चरण के मतदान में बीजपी को फायदा होता दिख रहा है, क्योंकि बहुत लोग खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन कहीं न कहीं वह गोंडसे की विचारधारा का समर्थन कर रहे हैं. अंतिम चरण में कुल 59 सीटों पर मतदान चल रहा है इनमें मध्य प्रदेश की 8 सीटें हैं. 

यदि जैसा कि लग रहा है साध्वी प्रज्ञा के बयान के बाद अंतिम चरण के मतदान में बीजपी को फायदा हुआ तो निश्चित रूप से बीजेपी में साध्वी प्रज्ञा का कद बढ़ेगा. कहा यहाँ तक जा रहा है कि मोदी यदि पद पर न होते तो वह भी गोंडसे की विचारधारा का समर्थन कर रहे होते. 

सवाल उठाये जा रहे हैं क्या हम एक राष्ट्र के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह उम्मीद कर सकते हैं कि वो गोडसे के विचारों की निंदा करेंगे. क्या मोदी और भाजपा यह कह सकेंगे कि वो गोडसे की विचारधारा से सहमति नहीं रखते.

कहा जा रहा है साध्वी प्रज्ञा सहित अन्य नेताओं के बयानों की निंदा और नोटिस पार्टी के लिए राजनीतिक मजबूरी रही है, क्योंकि गांधी इस देश के राष्ट्रपिता होने के नाते राजनीतिक रूप से इतनी बड़ी हस्ती थे कि इन बयानों की निंदा करना तो हर किसी की राजनीतिक मजबूरी है.

गोडसे ने गांधी की हत्या क्यों की थी? भले ही इस बारे में अनेक भ्रम फैलाने का काम पिछले 70 सालों से हो रहा हो कि उन्होंने मुस्लिमों के लिए अलग देश पाकिस्तान बनवाने का समर्थन किया. उन्हें 55 करोड़ देने की जिद की कर रहे थे, इसलिए कुछ ‘देशभक्त’ लोगों ने उनकी हत्या कर दी. बड़ा सवाल यह है कि गोडसे जिस विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते थे, भाजपा उसकी भर्त्सना करती है, या उसमें विश्वास करती है? क्योंकि, गांधी पर चली गोली भले ही गोडसे की रिवॉल्वर से निकली हो, लेकिन उसके पीछे एक विचारधारा थी, जिसने उन्हें मारा.

21 सितंबर 2016 को इस बारे में गांधीजी के परपोते तुषार गांधी ने भी इकोनॉमिक टाइम्स में लिखे लेख में यह सवाल उठाएं थे कि आखिर गोडसे के पीछे कौन-सी ताकतें थीं? कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा है प्रधानमंत्री मोदी बताएं वे गोंडसे पर क्या सोचते हैं. सच यह है कि वे खुद बचने की कोशिश कर रहे हैं. केवल 'मन से माफ़ नहीं कर पाऊंगा', कहने से कुछ नहीं होता. 



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