उस गुनहगार मौसम के लिए..


हाँ, सचमुच 
कहते हो तुम
एकदम खरी बात

स्मृतियों को अक्सर
नए मोड़ मिल जाते हैं 
और मौसम भी 
करवट बदल खुद 
को गुनहगार बना लेता है

पत्तियां झरती हैं और 
नई कोपल खिलती है
अगर इस पर तुम कहते हो
मैं खुश रहूँ तो यक़ीनन
मैं खुश हूँ तुम्हारे लिए
और उस
गुनहगार मौसम के लिए..


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News Digital India 18

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