क्या राफेल से बचने 'आक्रमण ही सबसे अच्छा बचाव' पर काम करेगी मोदी सरकार?


राफेल कांड 'चोकीदार चोर है' के बाद 'मैं भी चोकीदार' के शोर में लगभग छुपा जा रहा था और मोदी सरकार निश्चिंत लग लग रही थी. वह मानकर चल रही थी कि कम से कम लोकसभा चुनाव निपट जाने तक रफाल सौदे की कोई चर्चा न होगी. सरकार जनता के बीच यह धारणा बना देने में कामयाब भी हो गई थी कि राफेल पर सुप्रीमकोर्ट से सरकार को क्लीन चिट मिल चुकी है, लेकिन चुनाव के ऐन मौके पर रफाल कांड ज़िंदा हो गया. निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट ने सत्तारूढ दल के लिए एक बहुत बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है.

कांग्रेस देश में संवैधानिक संस्थाओं पर संकट की बात कर रही है, ऐसे में राफेलकांड पर सुप्रीमकोर्ट के इस सनसनीखेज फैसले से कम से कम उसकी विश्वसनीयता तो बहुत बढ़ गई है, लेकिन सरकार के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गई है. चुनाव के एन मौके पर सरकार पर राफेल कांड के बादल मंडरा जाना सरकार को हिला कर रख गया है. अब सवाल यह है कि सरकार इस संकट से कैसे निपटेगी? 
वरिष्ठ पत्रकार और अपराधशास्‍त्री श्री सुधीर जैन 

कोई भी अनुमान लगा सकता है कि सरकार राफेल के मोर्चे पर अपने बचाव के लिए अब सबकुछ झोंक सकती है. वह क्या करेगी? इसका अनुमान लगाना हो तो उस रणनीति का हवाला दिया जा सकता है, जिसमें कहा जाता है कि आक्रमण ही सबसे अच्छा बचाव होता है. इस तरह से लगता है कि मोदी सरकार अपने बचाव में विपक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोपों के प्रचार को अचानक बढ़ा सकती है, ताकि और कुछ हो या न हो कम से कम आरोपों की धार तो कम हो जाए. यह बात NDTV पर वरिष्ठ पत्रकार और अपराधशास्‍त्री श्री सुधीर जैन ने अपने आलेख में कही है. 

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