खजुराहो, मोदी की स्थानीय नेताओं पर सर्जिकल स्ट्राइक?


''पुराने जख्मों को याद करो, फिर मतदान करना और जरूर करना, जिससे वो ना चुनकर आ जायें, जो सांसदी का वेतन-सुविधाओं और आजन्म पेंशन पाने का लुत्फ़ उठाकर शुद्ध रूप से जनता को ठगने का काम करते हैं.'' 



धीरज चतुर्वेदी  
खजुराहो छतरपुर से  

टीकमगढ लोकसभा से वीरेन्द्र खटीक को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया, जो पिछले दस साल से यहां से सांसद है यहां तक कि वे केन्द्र सरकार में मंत्री तक बन गये. जनता भी उनके विकास कार्यो पर शर्म के मारे शर्मा जायेगी कि जिस महिला बाल विकास के वे मंत्री रहे, उनका ही विभाग उन्हे शर्मसार करता है. जो सादगी का परिचय देता फिरे वो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो जाये उनका पूरा व्यक्तित्व, इसकी तैयारी के साथ. 

कहा जा सकता है कि जिस तरह उनके भाजपा के शीर्ष मीडिया में छाने के लिये हमेशा कैमरा लेकर घूमते हैं तो वीरेन्द्र खटीक ने भी वही चेहरा दिखाया. वहीं जाओ जहां कैमरा साथ में हो और फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दो और हो गई जनता को मूर्ख बनाने की राजनीति. 

अब खजुराहो सीट से मुरैना से आयातित बीडी शर्मा को भाजपा ने प्रत्याशी बना दिया. देखो आप कि भाजपा के कई नेता कार्यक्रमों में पूरी जी जान लगाते रहे और प्रदेश स्तर तक पंहुचे. भाजपा को अपने स्थानीय नेताओं पर विश्वास कम था, तभी तो आकाश में मिसाईल की तरह और स्थानीय नेताओं पर सर्जिकल स्ट्राईक करते हुये मुरैना का प्रत्याशी लांच कर यहां थोप दिया गया. 

अब क्षेत्र में चर्चा छिड़ गई है पुराने जख्मों को याद करो, फिर मतदान करना और जरूर करना, जिससे वो ना चुनकर आ जायें, जो सांसदी का वेतन-सुविधाओं और आजन्म पेंशन पाने का लुत्फ़ उठाकर शुद्ध रूप से जनता को ठगने का काम करते हैं. 

जख्मों को याद करो तो सतना जिले के नागेन्द्रसिंह को भाजपा ने पिछले चुनाव में प्रत्याशी बनाया था. खजुराहो की जनता ने मोदी के नाम पर वोट दिये, लेकिन सांसद जी तो लापता हो गये. वे तो लोकसभा में भी नहीं मिले, जिसके लिये चुना गया था. एक भी सवाल खजुराहो क्षेत्र की जनता के लिये नहीं उठाये. जबकि पूरा क्षेत्र नये सांसद से नई आस संजोये था. यह तो करीब का चेहरा था, लेकिन अब तो खजुराहो से करीब 400 किलोमीटर दूर का चेहरा पटक दिया गया. 

सुनने में आ रहा है कि भाजपा के स्थानीय नेता पार्टी के इस पेराशूट, क्या सर्जिकल स्ट्राईक वाले प्रत्याशी के चयन से खुश नहीं हैं, जो भीतरघात कर लुटिया डूबाने के लिये कमर कस चुके हैं. ये होना भी चाहिये, क्योंकि यह तो स्थानीय भाजपा नेताओं का अपमान है. जिस पर उनका दल ही भरोसा नहीं कर रहा. आखिर क्यों पार्टी से जुडे थे, जिसके लिये जिल्लत सही और पार्टी को मुकाम तक पंहुचाने के लिये मेहनत की. यही बडा सवाल है. तभी तो आरडी प्रजापति जैसे लोग बगावती हो जाते हैं. 

यह बात अलग है आरडी प्रजापति जैसे लोगों ने इतनी पार्टी बदल दी, जिसे कपड़े बदलने की तुलना की जा सकती है. जो भी हो अगर आत्म-सम्मान हो या स्वाभिमान है तो भाजपा को ऐसे लोगों का विरोध मुखर होकर करना चाहिये, जो किसी की थाली की रोटी खीचकर ले जाये. 

कहा जाता है कि बीडी शर्मा के पास युवाओं की बड़ी फौज है. फिर तो यह छत्रसाल का इलाका है यहां तो हर वो फौज ढेर होती रही, जो यहां के साम्राज्य पर कब्जा करना चाहती रही. तभी कहते हैं टीकमगढ और खजुराहो लोकसभा पर जुमलों और कथित राष्ट्रभक्ति के नाम पर मतदान मत करना. उसका मनन करना, जो क्षेत्र के विकास के लिये लाभ का सौदा हो, क्योकि अब तो राजनीति भी लाभ का सौदा हो चुकी है. 

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