धरती माँ


अपनी धरती माँ के श्रंगार को नहीं उजाड़ना चाहिए ,
हर इंसान को कम से कम एक पेड़ लगाना चाहिए ।

क्या सदैव देने की रीत निभायेगी प्रकृति ही हमको ,
कुछ कर्तव्य हमको भी धरती माँ के प्रति निभाना चाहिए।

माना समय नहीं व्यस्त रहते हो अपनी ही तरक्की में,
पर बच्चों के लिए कुछ तो अच्छी विरासत बचाना चाहिए।

स्वच्छ रखो सदैव नदियों को प्रदूषित न होने दो जगको, 
फूलों हरियाली और नदियों से माँ को सजाना चाहिए।

कहे प्रज्ञा श्रृंगार उजड़ा माँ तो प्रकोप का भागी जग होगा,
बचने के लिए प्रकोप से, माँ को हरियाली से रिझाना चाहिए।

- प्रज्ञा पाण्डेय    
उन्नाव, उत्तर प्रदेश



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