दिग्विजय ने BJP को मुश्किल में डाला, तोमर मुरैना से ही ठोकेंगे ताल, भोपाल पर अभी भी असमंजस


''भोपाल सीट पर आज कल करते-करते BJP फंसती चली गई है. यह भी सही है कि किसी भी हाल में BJP यह महत्वपूर्ण सीट खोना नहीं चाहती, सो अब उमा भारती का नाम चर्चाओं में है, लेकिन अब हालात बदल गए हैं. यहाँ से कांग्रेस के दिग्विजय अजेय दिखने लगे हैं, ऐसे में BJP की चिंताएं बढ़ जाना स्वाभाविक है.''



राकेश तिवारी

ध्यप्रदेश में लोकसभा की आठ बची हुई सीटों के प्रत्याशी चयन को लेकर कल गुरुवार को भी भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली में बैठक में दावेदारों पर चर्चा तो हुई, लेकिन अभी तक भी कोई हल नहीं निकला है. पार्टी सूत्रों की मानें तो टिकट की देरी से कई सीटों पर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है. पूर्व में चर्चा में था कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भोपाल से लड़ाया जा सकता है, लेकिन अब श्री तोमर भी भोपाल से लड़ने के मूड में नहीं हैं. कहा जा रहा है यदि ऐसा हुआ तो भोपाल तो जायेगी ही, मुरैना भी जीतना मुश्किल हो जाएगा, सो अब श्री तोमर को मुरैना से ही चुनाव लड़वाने पर विचार किया जा रहा है या यूं कहें कि उन्हें मुरैना पर ध्यान देने के लिए कह दिया गया है.

भोपाल से साध्वी प्रज्ञा भारती और शिवराज सिंह का नाम जोरों से लिया जा रहा है, लेकिन शिवराज सहमत नहीं हैं. प्रज्ञा को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दबाव है, लेकिन इस पर अमित शाह सहमत नहीं हैं. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का नाम भी लगभग कैंसिल हो ही गया है. अब कौन हो सकता है भोपाल के लिए बीजेपी प्रत्याशी? सूत्र उमा भारती का नाम भी बता रहे हैं. हालांकि उमा भारती साफ़ मना कर चुकी हैं, लेकिन कहा जा रहा है उन्हें मनाने के प्रयास किये जा रहे हैं.

भोपाल संचार डॉट कॉम ने खबर दी है कि उमा भारती ने रजामंदी दे दी है. उमा भारती ने अमित शाह से मनमुटाव के चलते 2019 का लोकसभा चुनाव ना लड़ने का ऐलान कर दिया था. हालात को देखें तो अभी भी कुछ कहा नहीं जा सकता, कि वे यहाँ से बीजेपी उम्मीदवार हो सकती हैं, लेकिन हो जाती हैं तो यहाँ का चुनाव दिलचस्प होगा.

उमा भारती दिग्विजय सिंह के खिलाफ लगातार बोलती रहीं हैं, हो सकता है वह सहमत हो गई हों, लेकिन अब भोपाल में हालात देखें तो यहाँ दिग्विजय अच्छी घुसपैठ कर चुके हैं. भोपाल का गणित उनके पक्ष में साफ़ जाता दिखने लगा है. और इसका असर आसपास की सीटों पर भी पड़ना तय है. कांग्रेस भोपाल फ़तेह करेगी या नहीं, यह तो 23 को ही पता चलेगा, अलबत्ता यह अवश्य निश्चित हो गया है कि यह सीट BJP को चुनौतीपूर्ण होगी. BJP के रघुनंदन शर्मा भी बता रहे हैं पार्टी उम्मीदवार घोषित करने में देरी कर रही है, भोपाल में दिग्विजय सिंह काफी आगे निकल गए हैं, अब भरपाई करना मुश्किल होगा.

भाजपा ने अभी तक मध्यप्रदेश की जिन 21 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं, उनमें से भी कई जगह बगावत के हालात हैं. बालाघाट के सांसद बोधसिंह भगत ने पार्टी छोड़ निर्दलीय पर्चा भर दिया है. राजगढ़ में सांसद रोडमल नागर का विरोध हो रहा है. शहडोल में ज्ञानसिंह नाराज हैं.

सीधी में रीति पाठक के विरोधी मानने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में जिन नेताओं ने इनके टिकट की सिफारिश की है, शीर्ष नेता प्रदेश के उन नेताओं से खासे नाराज हैं. यही वजह है कि हाईकमान बची हुई सीटों को लेकर फूंक-फूंककर कदम रख रहा है.

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