अवतार भड़ाना : ना घर के रहे न घाट के, भड़ाना पर भारी पड़े नागर


''कहा जाता है कि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता है. ऐसा ही कुछ चार बार के सांसद और गुर्जरों के कद्दावर नेता कहे जाने वाले अवतार सिंह भड़ाना के साथ हो गया. वह आज ना घर के रहे, न घाट के. जिस सपने को लेकर वह भाजपा छोड़कर कांग्रेस में गये थे, उस सपने को काँग्रेस ने एक झटके में तोड़ डाला है.'' 



आकाश नागर 

वेलेंटाइन डे के दिन प्रियंका गांधी के समक्ष भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले अवतार सिंह भड़ाना ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी पुरानी कांग्रेस पार्टी उनके साथ ऐसा व्यवहार भी कर सकती है. जिस सपने को लेकर वह भाजपा छोड़कर कांग्रेस में गये थे, उस सपने को काँग्रेस ने तिगांव के विधायक ललित नागर को फरीदाबाद से टिकट देकर छिन्न भिन्न कर दिया हैं. 

तिगांव से पहली बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े ललित नागर को कांग्रेस ने फरीदाबाद से अपना पार्टी प्रत्याशित घोषित करके अवतार सिंह भड़ाना को जता दिया है कि पार्टी की नजर में भडाना से ज्यादा अहमियत नागर की है. तभी तो कहा जाता है कि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता है. 

उत्तर प्रदेश में खासकर वेस्टर्न यूपी में अवतार सिंह भड़ाना ने अपना सिक्का जमाने की कोशिश की थी. 2 साल पूर्व उन्होंने भाजपा ज्वाइन करके जैसे तैसे मुजफ्फरनगर की मीरापुर विधानसभा सीट से टिकट तो पा लिया, लेकिन उनका जो सबसे बड़ा मकसद था कि वह उत्तर प्रदेश की कैबिनेट मंत्रालय में शामिल होंगे वह पूरा नहीं हो सका. उत्तर प्रदेश में गुर्जर समुदाय से  भाजपा के 5 विधायक चुनकर गए थे. लेकिन पांचों विधायकों में अवतार सिंह भड़ाना अपनी पैठ नही बना सके. जिसके चलते  मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के समक्ष पाँचो विधायको में से किसी ने भी उनकी पैरवी नही की. और ना ही कैबिनेट मंत्रालय में उनका नाम प्रस्तावित किया गया.  

2 साल तक वह इस आस में बैठे रहे कि भाजपा सरकार उनको उत्तर प्रदेश में कैबिनेट मंत्री बनाकर महत्वपूर्ण ओहदे से नवाजेगी. लेकिन ऐसा हो नहीं सका. अंततः 14 फरवरी को वह अपने आप को भाजपा में उपेक्षित मानकर वह कांग्रेस में चले गए. तब प्रियंका गांधी पर उन्हें पूरा भरोसा था कि वह उन्हें हरियाणा की वीवीआइपी सीट फरीदाबाद से कांग्रेस का टिकट दिला देगी. 

लेकिन चार बार के सांसद पर एक बार का विधायक भारी पड़ा. कांग्रेस की राजनीति में नए आए तिगांव के विधायक ललित नागर ने बाजी मारी और टिकट अपने नाम करा लिया. ललित नागर के फरीदाबाद से कांग्रेस प्रत्याशी बनने के पीछे सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति राबर्ट  वाड्रा की दरियादिली है.  राबर्ट वाड्रा  का बिजनेस पार्टनर महेश नागर है. जो हरियाणा की विधानसभा सीट तिगाँव के विधायक ललित नागर का भाई है. रॉबर्ट वाड्रा ने अपने रिश्ते को मजबूत करते हुए ललित नागर को फरीदाबाद से कांग्रेस का उम्मीदवार बना दिया. 

ऐसे में अवतार सिंह भड़ाना अपने आप को कांग्रेस द्वारा छला हुआ महसूस कर रहे हैं. हालांकि चर्चा यह भी है कि वह 18 तारीख को निर्दलीय फरीदाबाद से नामांकन करने वाले हैं। अगर ऐसा होता है तो वह राजनीति की परिभाषा से वाकिफ नहीं है. जो लोग अवतार सिंह भड़ाना को भाजपा और कांग्रेस की मेंनस्ट्रीम में देख चुके हैं वह उन्हें निर्दलीय कैसे स्वीकार कर पाएंगे यह भविष्य के गर्भ में छुपा है ?

गुर्जर समुदाय में मजबूत पकड़ रखने वाले अवतार सिंह भड़ाना का आज राजनीतिक वजूद खतरे में पड गया है.गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में फरीदाबाद के वर्तमान एमपी कृष्णपाल गुर्जर ने अवतार सिंह भड़ाना को लगभग साढ़े 4.60 लाख मतों से शिकस्त दी थी। इस हार के बाद अवतार सिंह भड़ाना इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) में शामिल हो गए थे। इसके बाद वह वर्ष 2015 में भाजपा के संग हो लिए। उसके बाद भड़ाना को 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव में मीरापुर सीट से टिकट मिली,जिसको जीत में बदलकर वह विधानसभा जा पहुंचे।

लंबे राजनीतिक जीवन वाले नेता अवतार सिंह भड़ाना पहली बार 1991 में कांग्रेस के टिकट पर फरीदाबाद से लोकसभा सदस्य चुने गए थे। उसके बाद 1999 के लोकसभा चुनाव में अवतार सिंह भड़ाना को कांग्रेस ने मेरठ लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया वहां से भी उन्होंने जीत हासिल की थी। इसके बाद पुनः 2004 में अवतार सिंह भड़ाना फरीदाबाद से कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे और जीत हासिल की। 2009 के लोकसभा चुनाव में भी अवतार ने फरीदाबाद से कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीत दर्ज की। इस तरह से अवतार सिंह भड़ाना 3 बार फरीदाबाद लोकसभा व एक बार मेरठ लोकसभा से सांसद रहे हैं। वह मौजूदा समय मे यूपी की मीरापुर विधानसभा सीट से विधायक हैं।
Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc