कहते हैं लोग पानी नहीं धरती में और वो सातवी कक्षा की लड़की




प्रेरक 


वो सातवी कक्षा की लड़की स्कूल से घर आई. पानी पिए बगैर बाल्टी से डिब्बे को भरकर सीढियां चढ़ी. घर के पिल्लर की तराई कर रही थी. इस तेज धूप में, जो मार्च की नहीं हो सकती, में वह लू लगने के तमाम खतरे को उठाती हुई, लगातार पानी दे रही है. 

मकान बनाने के लिए बाजार में पानी बिक रहा है. इस तपते हुए मौसम में किराए पर लिए पानी से घर मजबूत बनने की हसरत है.


कहते हैं लोग पानी नहीं धरती में.
2017 का मार्च का आखरी दिन. 
सच तो यह कि पानी नहीं रहा लोगों में, क्योंकि उन्होंने बेच खाया.
और पानीदार है वो लड़की, कि उस घर को बनवा रही है, जिसमें उसे शादी के बाद नहीं रहना है.
- कैलाश वानखेड़े




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