हे अभिनय सम्राट, तुम मुझे क्या दोगे?



अगर तुम रहे कुछ दिन 
भी सरदारी में,
बहुत शीघ्र गांधी,
सुभाष के गौरव को 
गौतम बुद्ध की गरिमा 
कबिरा के दोहे,
सर्वधर्म समभाव 
कलंकित कर दोगे!
बड़बोले हो दोस्त सिर्फ धनपतियों के 
नील में रंगे सियार, तुम 
मुझे क्या दोगे?

दुःशासन दुर्योधन शकुनि 
न टिक पाएं!
झूठ की हांडी बारम्बार 
न चढ़ पाए,
बरसों से अक्षुण्ण रहा 
था, दुनियां में,
भारत आविर्भाव, 
कलंकित कर दोगे!!
भारत रत्न मिले, तुमको मक्कारी में 
कितने धूर्त महान, तुम 
मुझे क्या दोगे?

है विश्वास मुझे तुम 
जल्दी जाओगे!
बस अफ़सोस यही
अपयश दिलवाओगे 
पंचशील सिद्धांत,
सबक इतिहासों का 
दोस्त पुराने भुला 
नए दरवाजों पर,
बचा खुचा सम्मान समर्पित कर दोगे 
हे अभिनय सम्राट, तुम 
मुझे क्या दोगे?

-सतीश सक्सेना   



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