शासकीय सेवा में हैं, तो मोबाइल को ताबीज बना लीजिये, स्टेनो को महंगा पड़ गया फोन न उठाना, फोन पर ही तत्काल सस्पेंड



''क्या यार तुम फोन नहीं उठाते हो? अक्सर इस सवाल से आपका भी सामना हुआ होगा, लेकिन यदि आप शासकीय सेवा में हैं, तब तो मोबाइल को अपने गले में ताबीज बना कर डाल ही लीजिये. भले ही रात क्यों न हो, न तो मोबाइल सायलेंट मोड में होना चाहिए और न ही डिस्चार्ज, अन्यथा महंगा पड़ सकता है. ऐसा ही कुछ शहडोल कलेक्टर के स्टेनो के साथ हाल ही घटित हो गया. फोन न उठाना स्टेनो को महंगा पड़ गया. नाराज अधिकारी ने फोन पर ही स्टेनो को तत्काल सस्पेंड करवा दिया.''

हुआ यूं कि शहडोल कलेक्टर ललित दाहिमा 28 मार्च को भोपाल के लिए ट्रैन से निकले थे, रात में उन्होंने किसी काम से अपने स्टेनो दुगार्शंकर श्रीवास्तव को फोन लगाया, लेकिन स्टेनो कलेक्टर का फोन नहीं उठा सके, जिससे कलेक्टर भड़क गए और उन्होंने एसडीएम को फोन लगाकर स्टेनो को तत्काल सस्पेंड करने के आदेश दे दिए.

कलेक्टर ललित दाहिमा चुनाव ट्रेनिंग के लिए भोपाल में हैं. 28 मार्च को वे भोपाल के लिए निकले और रात के समय उन्होंने किसी जरूरी कार्य से स्टेनो दुगार्शंकर श्रीवास्तव को फोन लगाया, लेकिन स्टेनो फोन नहीं उठा पाए, जिससे नाराज कलेक्टर भड़क गए और उन्होंने तभी एसडीएम अशोक ओहरी को फोन लगाकर स्टेनो को तत्काल सस्पेंड करने का फरमान सुना दिया. इतना ही नहीं कलेक्टर ने यह भी फरमान सुनाया कि तत्काल निलंबित कर आदेश की कॉपी व्हाट्सएप पर भेजी जाए. आनन फानन में एसडी ने रात में ही स्टेनो को सस्पेंड करने का आदेश जारी करवाया और कलेक्टर को इसकी सूची मोबाइल पर भेजी गई.

वहीं स्टेनो दूसरे दिन जब दफ्तर पहुंचा तो उसे निलंबन की जानकारी मिली. इस पर स्टेनो दुगार्शंकर श्रीवास्तव का कहना था कि फोन साइलेंट था, इसलिए कॉल देख नहीं पाया. बाद में जब उन्होंने कलेक्टर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई. स्टेनो के विरुद्ध पदीय दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करने और कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने पर सिविल सेवा आचरण नियम के तहत कार्रवाई की गई है.



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