लीवर हो फैटी, तो ये करें, जानें लक्षण, करें ये घरेलु उपचार


''जब दवाएँ काम करना बंद कर देती हैं तब लीवर खराब हो जाता है। ऐसे में लीवर ट्रांस्पलांट ही अंतिम विकल्प होता है। लीवर ट्रांस्पलाण्ट में 18 से 21 लाख तक का खर्च आता है। लीवर ट्रांस्पलाण्ट केवल कार्पोरेट हस्पतालों में ही होता है। एम्स जैसे सरकारी हाॅस्पिटलों में भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। कहा जा सकता है सरकारी सहयोग के बिना सस्ता इलाज असम्भव है।''  

विश्व में हर साल एक करोड़ लोग फैटी लीवर के मरीज हो रहे हैं। इसके होने का प्रमुख कारण मोटापा होता है। वैसे  जिन लोगों को टाइप 2 मधुमेह होता है, उनका भी लीवर फैटी हो जाता है। अत्यधिक शराब पीने वालों को भी यह बीमारी लगती है। इसके अतिरिक्त दूषित पानी पीने, पुराना मलेरिया ज्वर और अमेबिक पेचिश भी इसका कारक होता है। तले हुए और घी में बने खाद्यान्न भी लीवर को फैटी कर देते हैं। साथ ही ज्यादा मात्रा में मिठाई खाना भी लीवर को फैटी बना देता है। 

लीवर फैटी होने का प्रमुख लक्षण कमजोरी, थकान, पेट में दायीं तरफ भारीपन या दर्द तथा वजन कम होना होता है। लीवर फैटी के तीन ग्रेड होते हैं, जिनमें ग्रेड वन बेहद मामूली, ग्रेड टू असरदायी और ग्रेड थ्री बेहद गम्भीर किस्म का रोग होता है।

लीवर को यकृत या जिगर भी कहते हैं। लीवर खराब होने पर कब्ज, चेहरा पीला और आंखों में रक्ताल्पता नजर आने लगती है। मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है। दाहिने कंधे के बीच में दर्द रहने लगता है। लीवर फैटी हो जाने पर वह रक्त से विषाक्त पद्यार्थ नहीं निकाल पाता। लीवर स्पंज जैसा नाजुक होता है। ज्यादा नमक खाने वाले लोगों का भी लीवर फैटी होता है। धूम्रपान भी लीवर का दुश्मन होता है। फैटी लीवर हीं आगे चलकर सिरोसिस बन जाता है। लीवर सिरोसिस में लीवर सिकुड़ने लगता है। यह सिकुड़कर कठोर होने लगता है।

70% लीवर की बीमारी हेपाटिटिस बी व सी के कारण होती है। केवल 30% हीं गलत खान पियन और रहन सहन की वजह से यह बीमारी होती है। लीवर सिरोसिस की बीमारी आगे चलकर कैंसर में तब्दील हो सकती है।90% लीवर कैंसर खराब लीवर में हीं पनपता है। केवल 10% लीवर कैंसर अन्यान्य कारणों से होता है।

जब दवाएँ काम करना बंद कर देती हैं तब लीवर खराब हो जाता है। ऐसे में लीवर ट्रांस्पलांट ही अंतिम विकल्प होता है। लीवर ट्रांस्पलाण्ट में 18 से 21 लाख तक का खर्च आता है। लीवर ट्रांस्पलाण्ट केवल कार्पोरेट हस्पतालों में ही होता है। एम्स जैसे सरकारी हाॅस्पिटलों में भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। कहा जा सकता है सरकारी सहयोग के बिना सस्ता इलाज असम्भव है। जिन लोगों ने सी जी एच एस या कोई और हैल्थ स्कीम की सुविधा ले रखी है, उनके लिए तो लीवर ट्रांस्पलाण्ट कराना सुगम्य है। आम आदमी के लिए लीवर ट्रांस्पलाण्ट कराना आकाश कुसुम है।

कई बार गर्भवती स्त्रियों का भी लीवर फैटी हो जाता है। इसका कोई खास कारण नजर नहीं आता। शायद ऐसा हार्मोन में बदलाव होने के कारण होता होगा। कई को पौष्टिक आहार देने के नाम पर केवल देसी घी से बने खाद्यान्न हीं खिलाए जाते हैं, जिससे उनका लीवर फैटी हो जाता है। ऐसा होना बेहद खतरनाक होता है। जच्चा बच्चा में से किसी एक की किडनी खराब होने का डर रहता है। जच्चा बच्चा को गहन चिकित्सकीय कक्ष में रखा जाता है। चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत कुछेक सप्ताह में लीवर अपनी जगह पर आ जाता है। जच्चा बच्चा दोनों बच जाते हैं।

फैटी लीवर की हालत में तली हुई चीजों का त्याग कर देना चाहिए। साग सब्जी का सेवन बहुतायत में करने चाहिए। फलों का उपयोग लीवर को स्लिम होने में मदद करता है। वैसे एक बार जब लीवर फैटी हो जाता है तो उसे अपनी जगह में आने में समय लगता है। हो सकता है सालों लग जाए या ताजिंदगी यह फैटी ही बना रहे, लेकिन दवाएँ काम करतीं हैं तो लीवर का फैटी होना रुक जाता है। फैटी लीवर वालों को योगासन और प्राणायाम करना चाहिए। इनसे मोटापा कम होता है। मोटापा कम होने के कारण लीवर को अपने पूर्ववत स्थिति में आने में मदद मिलती है। योगासन में गोमुखासन, मत्स्येंद्रासन और नौकासन करना चाहिए। प्राणायाम में कपाल भांति, अनुलोम विलोम उपयोगी होता है। लीवर फैटी होना कई बार अनुवांशिक भी होता है।

उपचार 
बुरी तरह डैमेज हो चुके लीवर को ठीक कर सकती है 70 रूपये की ये चीज, डायबिटीज से भी करती है बचाव गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका उपयोग सालों से भारतीय चिकित्सा में किया जा रहा है। संस्कृत में, गिलोय को 'अमृत' के रूप में जाना जाता है क्योंकि इसके प्रचुर मात्रा में औषधीय गुण हैं। खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) ने भी इसके लाभ और उपयोग को मान्यता दी है। गिलोय का रस, पाउडर या कैप्सूल के रूप में सेवन किया जा सकता है।  
गिलोय प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने, सूजन को कम करने और त्वचा की समस्याओं से लड़ने में मदद करता है। इसके अलावा इस पौधे में हेपोटोप्रोटेक्टिव गुण भी होते हैं। अध्ययन में पाया गया कि गिलोय लीवर (फाइब्रोसिस) के निशान को रोक सकता है और डैमेज लीवर टिश्यू को दोबारा सही कर सकता सकता है।

इसके अलावा, जड़ी बूटी के एंटीऑक्सीडेंट गुण गैर-अल्कोहल फैटी लीवर डिजीज को रोक सकते हैं। इसमें फ्री रैडिकल डैमेज को कम करके पीलिया और हेपेटाइटिस से बचना की क्षमता होती है। 

खराब खानपान और जीवनशैली की वजह से लीवर पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि लीवर में सूजन और गुणवत्ता में खराबी की समस्या हो जाती है। लीवर को हेल्दी रखने में गिलोय आपके काफी काम आ सकता है। 

ऐसे करें गिलोय का इस्तेमाल
अध्ययन बताते हैं कि प्रति किलोग्राम शरीर के वजन के अनुसार 400 मिलीग्राम गिलोय लेने से फायदा होता है। इतनी मात्रा में गिलोय पाउडर को 10-20 मिलीलीटर एलोवेरा या व्हीटग्रास जूस के साथ लेने से लीवर को डिटॉक्स किया जा सकता है। 

दूसरा तरीका यह है कि नियमित 15 से 20 गिलोय की पत्तियां और साथ में किशमिश मिलाकर उसका नियमित रूप से सेवन करें। ऐसा करने से आपका लीवर एकदम फिट रहेगा।

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