आज भी प्रासंगिक है अंग्रजी हुकूमत के खिलाफ निकलने वाले अखबार "गदर" का यह एक अंश


समस्या हिन्दू बनाम मुस्लिम की नहीं है, बल्कि शोषक बनाम शोषितों की है।

"हम किसी भी धर्म, जाति, वर्ण के होने के पहले इंसान हैं। बेहतर है कि हम आर्थिक मसलों पर ज्यादा ध्यान दें, क्योंकि उनका हम सभी के जीवन पर एक जैसा ही प्रभाव पड़ता है। प्लेग से हिन्दू भी मर रहे हैं और मुसलमान भी। अकाल पड़ने पर अन्न से दोनों वंचित रहते हैं। पगार के लिए जोर-जबरदस्ती दोनों पर ही की जाती है और दोनों को ही अत्यधिक ऊँची दरों पर भू-राजस्व तथा जल-कर देना पड़ता है। समस्या हिन्दू बनाम मुस्लिम की नहीं है, बल्कि शोषक बनाम शोषितों की है। इसलिए हमें अपने आपसी सौहार्द्र और एकता को मजबूत बनाना चाहिए, जिससे कोई उसे तोड़ न सके।"

प्रस्तुति / सारिका श्रीवास्तव   

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