चौकीदार का ज़मीर अभी जिंदा है, उसे चौकीदार ही रहने दो?




चौकीदार को बदनाम न करो, क्योकि चौकीदार का ज़मीर अभी जिंदा है, उसे चौकीदार ही रहने दो? ज़रा सोचो तो जो असल में चौकीदार है उनके बच्चो पर क्या बीत रही होगी?


Mukesh Thakur  
facebook वाल से 

किन परिस्थितियों में आदमी को चौकीदार की नोकरी करनी पड़ती है यह उनके परिजनों से बेहतर कोई नही जानता! किसी को माँ, बाप का इलाज कराना है, किसी को बहन की शादी करनी है, किसी को अपने बच्चो का भविष्य बनाना है, चौकीदार को राजनीति नही करनी होती है? किंतु राजनेताओं ने उनकी गरीबी परिस्थितियों का मख़ौल बना रखा है. देश के सर्वोच्च पद पर बैठे लोग ही उनके मख़ौल के जिम्मेदार है. क्या जरूरत थी यह कहने की कि में "चौकीदार" कहते न में एक राजनेता हु, जिसे राजनीति करनी है चौकीदारी नही ? 


पूरे देश मे सोशल मीडिया पर नारा छाया हुवा है कि "चौकीदार चोर है "वो चौकीदार (राजनेता नही हो सकता) किन परिस्थितियों में गरीबी से जूझते हुवे अपने बच्चो, परिवार की परवरिश कर रहा वह वही जानता है ! ऊपर से राजनेताओं की करतूत "मैं चौकीदार...'' जवाबी हमले में ''चौकीदार चोर है?'', ने चौकीदार उनके बच्चो, परिवार पर क्या बीत रही होगी? 

किसी ने सोचा है यदि चौकीदार के बच्चे स्कूल में पड़ रहे तो सहपाठी चिड़ायेंगे चौकीदार चोर है? पड़ोसी मख़ौल उड़ायेंगे, चौकीदार चोर है? किसी राजनेता देश के सर्वोच्च पद पर बैठे या पड़े लिखे ने सोचा होगा अगर चौकीदार में योग्यता होती तो वह चौकीदारी नही करता वह भी पड़ लिखकर राजनेता,प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, आईएएस, आईपीएस, उधोगपति बनता न कि चौकीदारी करता! राजनेताओं गंदी राजनीति मत करो? चौकीदार को बदनाम न करो क्योकि चौकीदार का ज़मीर अभी जिंदा है, उसे चौकीदार ही रहने दो? 





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