देवभूमि उत्तराखंड में जरुरत है महेश नेगी जैसे जनप्रतिनिधि की, जो विकास की नई इबारत लिख सके



''पिछले 15 सालों से द्वाराहाट की जनता लगातार मांग कर रही है कि यहां एक अल्ट्रासाउंड सेंट्रर शुरू कर दिया जाए, जिससे मरीजों को परेशान न होना पड़े, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. ना कोई नेता और ना विधायक इस तरफ सोच रहे हैं. तब मैं जनप्रतिनिधियों पर सोचने को मजबूर हो गया कि आखिर हम इन लोगों को वोट क्यों देते हैं? इस बात का उत्तर मिला भाजपा के स्थानीय विधायक महेश नेगी से, जिन्होंने समस्या को जाना और अल्ट्रासाउंड शुरू करा कर मरीजों, खासकर महिलाओं को रामबाण सी औषधि प्रदान कर दी है.''






तीन साल पहले की बात है, जब मैं द्वाराहाट से रानीखेत आ रहा था. टैक्सी में आना था. पता चला कि पहले से ही टैक्सी में एक व्यक्ति अपनी पत्नी को अल्ट्रासाउंड कराने रानीखेत ले जा रहा था. मैंने उससे पूछा कि 'क्या द्वाराहाट में अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है?' तो उसने कहा कि 'भाई साहब पिछले 15 सालों से क्षेत्र की जनता लगातार मांग कर रही है कि यहां एक अल्ट्रासाउंड सेंट्रर शुरू कर दिया जाए, जिससे मरीजों को परेशान न होना पड़े, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. ना कोई नेता और ना विधायक इस तरफ सोच रहे हैं.' तब मैं जनप्रतिनिधियों पर सोचने को मजबूर हो गया कि आखिर हम इन लोगों को वोट क्यों देते हैं? 

इसीलिए न कि वह हमारे हर दु:ख दर्द को दूर कर सके. लेकिन द्वाराहाट क्षेत्र में तो उल्टा ही हो रहा था. भला हो भाजपा के स्थानीय विधायक महेश नेगी का, जिन्होंने गत दिनों क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड शुरू करा कर मरीजों खासकर महिलाओं को रामबाण की सी औषधि प्रदान कर दी है. अब उन्हें 50 किलोमीटर दूर रानीखेत नहीं जाना पड़ेगा और ना ही एक अल्ट्रासाउंड कराने के लिए हजारों रुपये खर्च करने पडेंगे. 

भाजपा विधायक महेश नेगी एक ऐसे विधायक हैं, जो रोजाना 50 से 60 किलोमीटर क्षेत्र में भ्रमण करते हैं. मेरी नजर से पूरे प्रदेश में महेश नेगी एक ऐसे विधायक हैं, जो सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं. उनकी सक्रियता का आलम यह है कि जब वह पहाड़ के दुर्गम इलाकों में सुबह को निकल जाते हैं तो अनुमान नही लगाया जा सकता कि शाम कहां होगी. रात को किसी दूर दराज के  गांव में भी लोगो के बीच उनकी समस्याए सुनते हुए रात गुजर जाती हैं. मैं इस बात का चश्मदीद गवाह रहा हूं. 

कई साल पहले जब वह विधायक नहीं थे तो मैं उनके साथ गांव-गांव, डगर-डगर गया. हम कई दिनों तक पहाड़ की पगडंडियों पर सुगम से दुर्गम इलाकों में घूमते रहते थे. लोगों की समस्याएं सुनते रहे.  तब मैं नेगी जी से कहा करता था कि 'आखिर इन लोगों की समस्याओं का समाधान कब होगा?' तब महेश नेगी कहते थे कि 'जब मैं विधायक बनूंगा'. हालांकि मैं पिछले 2 साल से देख रहा हूं कि महेश नेगी ने द्वाराहाट क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछा दिया है. गगास नदी डेम पर काम शुरू करा दिया है. पेयजल की योजनाएं सुचारू करा दी है. 

गत दिनों सड़क बनाने के मामले में बहुत कम खर्च पर एक सड़क का निर्माण कर वह सुर्खियों में रहे हैं. यहां तक कि प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनकी काफी सराहना की है. महेश नेगी दो बार नेशनल चैंपियनशिप रह चुके हैं और पिथौरागढ़ में स्पोर्ट्स के जिले के अधिकारी रह चुके हैं. एक स्पोर्ट्स ऑफिसर ने अफसरशाही को त्याग कर समाज सेवा को अपनाया. 

इसके बाद लगातार तीन बार चुनाव हारने के बाद जब चौथी बार वह भाजपा के टिकट पर 2017 में चुनाव लड़े तो मतदाताओं ने बंपर वोटों से जिताया. तब लोगों को महेश नेगी से बहुत उम्मीद थी, जिन पर वह खरा भी उतरते नजर आ रहे हैं. आज जरुरत हैं देवभूमि उत्तराखंड में महेश नेगी जैसे जनप्रतिनिधियो की, जो विकास की नई इबारत लिख सके ...

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