इन्हें तो उनकी शहादत पर भी राजनैतिक लाभ चाहिए


केन्द्र सरकार जबाव दे और माँग के बावजूद भी सेना को विमान मुहैया न कराए जाने पर ज़िम्मेदारी तय कर कार्यवाही की जाए और सेना के बड़े काफिलों को लम्बी दूरी तक बड़े आकार के विमानों से ले जाने का नियम बने। यदि भारत सरकार ने सेना की विमान भेजने की माँग मान ली होती तो आज यह 42 जांबाज सेना के जवान हमारे साथ होते। यहां तो बगैर निहित स्वार्थ के कोई निर्णय ही नहीं होता। 

सरकारें लापरवाही की रजाई ओढ़कर सो जाती हैं। फिर जब हादसे होते हैं तो भी बड़े नेताओं और उनके समर्थक पूंजीपतियों को कोई फ़र्क नहीं पड़ता क्योंकि शहीद होने वालों में अथवा पूरी सेना में उनके अपने बच्चे नहीं होते। सेना में तो वैसे भी गरीब किसान, मजदूर और आम आदमियों के बच्चे होते हैं। इसलिए वे मरें तो मरें। इन्हें क्या फ़र्क पड़ता है। इन्हें तो उनकी शहादत पर भी राजनैतिक लाभ चाहिए।

कश्मीरियों पर हमले करके हम क्या दर्शाना चाहते हैं?
पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों को पुनः श्रद्धांजलि देते हुए हमें राजनैतिक लाभ के लिए बनाये जा रहे साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के घृणित माहौल से सावधान रहना होगा। दोस्तो यह देश के तोड़ने का नहीं बल्कि जोड़ने का समय है। सरकार को समाधान को जड़ में जाकर तलाशना होगा। आतंकवाद का मुकाबला अनिवार्य है। आत्मरक्षा हमारा अधिकार है।पर कश्मीरियों पर हमले करके हम क्या दर्शाना चाहते हैं। कश्मीर सहित देश के सभी मुसलमान हमारे हमवतन और भाई हैं। धर्म और जाति के आधार पर बांटने वालों को हमें हतोत्साहित और निराश करना होगा। नफ़रत की राजनीती को प्रश्रय नहीं दिया जा सकता। यह नाजुक और सावधान रहने का वक़्त है।

इस बेहद दुःखद आतंकवादी घटना के लिए ज़िम्मेदार लापरवाही की जाँच कर ज़िम्मेदारी तय की जाए और जरूरी कार्यवाही हो कि इंटेलिजेंस की पूर्व अलर्ट सूचना के यह घटना घट कैसे गई। इतना अधिक विस्फोटक कहाँ से आया और किन लोगों ने उसे उपलब्ध कराया? सेना का इतना बड़ा काफ़िला जब गुजर रहा था तब आम ट्राफिक क्यों नहीं रोका गया ? आदि-आदि।

C R P F को अर्द्धसैनिक से सैनिक बल का दर्जा देकर देश के लिए जान न्यौछावर करने वालों को शहीद का दर्जा दिया जाए। उनके परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। उनके आश्रितों को सरकारी सर्विस मिले और शहीदों के बच्चों के भरण -पोषण और पर्याप्त सम्पूर्ण शिक्षा की ज़िम्मेदारी सरकार ले। 


किसी भी प्रकार से उन्मादी माहौल फैलाने से रोका जाए। देश में शांति , साम्प्रदायिक सदभाव, भाईचारे और अमन चैन की रक्षा की जाये। जनमुद्दों को हल करने में असफल हो चुकी देश की राजनैतिक व्यवस्था आगामी लोकसभा चुनावों में संभावित साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए फिर से विभाजनकारी नीति अपनाकर सफल न होने पाए।

- सुरेन्द्र रघुवंशी, अशोकनगर 
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