प्रेम एक प्रसाद है, जो अपना सा लगे..



प्रेम भरी कहानी   


''कितने लोग तुम्हे प्यार करते हैं? सोचो, ए बताओ न कौन है, जिसके लिए लिखते हो? सैम हल्के से मुस्कुराते हुए कहता है "अरे! कोई मिली ही नहीं  सच में" जबकि भीतर से सैम के मन में एक उमंग लहरा रही थी.''
- मनु   


सैम एक समझदार औऱ बेहद अल्हड़ सा बेबाक, लेकिन सम्मान देने वाला किरदार. किसी का भी मजाक उड़ाते नहीं देखा उसे कभी किसी ने. हौले हौले काफी लोग उससे जुड़े भी. लेकिन वो शायद खुद को किसी से जोड़ नहीं पाया. जाने कुछ खाली सा लिए अपने साथ वो चलता रहा.

एक दिन एक महिला को उसने देखा तो उसके भीतर कुछ ऐसा लगा कि इस महिला में कोई एक लम्हा है, जो अपना सा है, लेकिन मर्यादा का ध्यान रखते हुए उसने किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं  किया कि वह एक विवाहिता थी. बस एक दोस्त के रूप में उसे अपने भीतर पालता रहा. उसके सपने, उसकी बातें, उसके भाव, उसके रूप को सहेजता रहा.

तारीफ की बात की उस महिला को भी सैम की दोस्ती अच्छी लगने लगी परन्तु असहज कभी वो भी न हुई. कभी कभार उतावला पन दोनों में आ जाता.  लेकिन हर बार सैम खुद को ठिठका लेता की बेवजह कोई बात को जन्म नहीं  देना है.

तनु :- सैम, तुम्हारे लिए अक्सर सोचा तो पाया कि तुम खुद को अल्हड़ पन के पीछे छिपाए रहते हो. पगलु कोई मिली तो होगी. कितने लोग तुम्हे प्यार करते हैं सोचो, ए बताओ न कौन है, जिसके लिए लिखते हो?

सैम :- हल्के से मुस्कुराते हुए कहता है "अरे! कोई मिली ही नहीं  सच में" जबकि भीतर से सैम के एक उमंग लहरा रही थी.

तनु :- झूठे, ऐसा नहीं  है. अब तुम बताना नहीं चाहते तो कोई बात नहीं. 

सैम :- प्लीज़ नहीं न सच मे कोई नहीं  है " सैम झूट मूठ बोल गया मेरा मन किसी के प्यार में भरता ही नहीं है."

तनु :- कुछ पल सोचती रही लेकिन सैम का साथ उसे भी मधुर लगता था, इसलिए चुप रही. इतने में सैम ने बात बदल दी.

सुनो न आपका पसंदीदा रंग कौन सा है, कह के सैम चुप हो गया.
लेकिन तनु झट से बोल उठी "मेहरून" 
उफफफ सैम का दिल बहुत जोर से धड़का औऱ बोल उठा "गज़ब"!! 
मेहरून तो उसका भी पसन्द का रंग है! 
वह कह उठा "रंगों में एक रंग है दोस्ती, मेहरून हो तो अपना सा है."

तनु :- क्या क्या, क्या?

सैम :- कुछ नहीं न, स्वीट दोस्त.
इस तरह चलते करीब लम्बा वक़्त हो चला है इस दोस्ती को.
लेकिन सैम ने कभी भी 'i love you' जैसा प्रदर्शन नहीं किया.

एक दिन तनु उदास सी थी अपनी जिंदगी को लेकर. सैम को उसके अंदाज़ से समझ आ जाता था कि आज तनु का मन कैसा है?

सैम :- क्या बात बाबू आज उदास क्यों? 

तनु :- नहीं तो, 

सैम :- सुनो तुम्हारे इलाके की हवायें समझ आती हैं, समझी.

तनु :- सैम कुछ चीज़ें, रस्मे, रिवाज से बाहर नहीं है न एक स्त्री इसलिए.
क्या कहूँ. 

सैम :- अच्छा, लेकिन सैम ने कभी तनु को पाना नहीं चाहा, बस उसका होना ही सैम का सुकून रहा.

तनु सुनो न "तुम जिस्म नहीं हो मेरे लिए." 

हाँ सैम शायद इसलिए मैं तुम्हारे आसपास हूँ.

और ये सच भी रहा कि तनु ने कभी खुद को कमजोर नहीं होने दिया था जीवन में. तनु का सैम के आसपास होना सैम को प्रफुल्लित कर जाता. औऱ तनु को सबसे पहले सैम को सुनना बहुत भाता. लेकिन मर्यादा से बंधी तनु चुप चुप सी छुप छुप के पढती रहती. औऱ सैम का मौन सा प्यार आज भी तनु के लिए है.

औऱ इस सिलसिले को चलते काफी लंबा अरसा बीत गया है. लेकिन दोनों के दिल में आज भी मधुर भाव हिलोरे लेता है.





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