भाभी अमृता के चुनाव लड़ने की संभावनाओं के चलते लक्ष्मण सिंह ने जताया विरोध, लिखा 'नेताओं की पत्नियों को लड़ाना, अत्यंत हानिकारक होगा'




''माना जाता है पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई विधायक लक्ष्मण सिंह की राजनीति उनके दम पर है, लेकिन फिर भी वे अपने भाई को मुसीबत में डालने का कोई मौका नहीं चूकते. लक्ष्मण सिंह ने दिग्विजय सिंह की पत्नी यानि उनकी भाभी अमृता राय के चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से अपना विरोध जताया है. ऐसा उन्होंने लोकसभा चुनाव में नेताओं की पत्नियों को चुनाव लड़ाना हानिकारक होगा, जैसा ट्वीट कर किया है.'' 




मीडिया में ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह की पत्नियों के नाम भावी प्रत्याशी के रूप में चल रहे हैं. राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राजगढ़ से दिग्विजय सिंह की पत्नी को लोकसभा टिकिट दे दिया गया तो खुद लक्ष्मण सिंह का पत्ता कट सकता है. 

लक्ष्मण सिंह का राजनीतिक ग्राफ भारी उतार-चढ़ाव वाला रहा है. यही वजह है कि कांग्रेस में उनकी गिनती किसी निष्ठावान कांग्रेसी के तौर पर नहीं होती है. 2003 में जब मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह चुनाव हारे तो लक्ष्णण सिंह फौरन पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए. वहां से कांग्रेस पर प्रहार करते रहे. भाजपा के टिकट पर वे राजगढ़ से सांसद बन गए. 2009 के लोकसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह ने किसी और को न सिर्फ टिकट दिलाया, बल्कि उसे जिताने में अपनी ताकत भी लगा दी.

उल्लेखनीय है हाल में कमलनाथ मंत्रीमंडल में भी दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह को मंत्री बनाने में प्राथमिकता दिए जाने से लक्ष्मण सिंह मंत्री बनने से वंचित रह गए हैं. सो अब वह दूध का जला छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है, जैसी बात कर रहे हैं.   

अपने ट्वीटर पर लक्ष्मण सिंह ने यह ट्विट किया है- 


लोक सभा चुनाव में नया चेहरा,जो कभी लोक सभा का चुनाव नहीं लड़ा हो,को अवसर देना चाहिये।पुराने चेहरों पर दांव खेलना,हानिकारक होगा।नेताओं की पत्नियों को लड़ाना,अत्यंत हानिकारक होगा



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