अवैध कोयला खनन की गर्त में उतरे कलेक्टर और एसपी, 15 साल से भाजपा संरक्षण में चल रही कोयला खदानों की सामने आई हकीगत


''ऐसा बैतूल जिले के इतिहास में पहली बार हुआ जब कोई कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक बिना किसी लावा लश्कर के सीधे उन एक दर्जन से अधिक बीते 15 सालो से चल रही अवैध कोयला खदानों के सीधे गर्त में पहुंचे। अवैध कोयाला खदानों की जमीनी हकीगत देख कर दोनों अधिकारी हैरान एवं परेशान हो गए! एक दुसरे का मुँह ताकते अधिकारी अपने ही अधिनस्थ बीते 15 वर्षो से चल रही कोयला खदानों के सच को सामने लाने का साहस दिखाने में पीछे नहीं रहे। ''
बैतूल से रामकिशोर पंवार 

कल रविवार शासकीय अवकाश होने के बाद भी दोनों ही जिम्मेदार अधिकारी अपने परिवार को समय न देकर सीधे एक ऐसी अनसुलझी पहेली को सुलझाने के लिए निकल पड़े, जो बैतूल जिले के एक दर्जन से अधिक कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के लिए सामान्य घटना भर थी। यही कारण इसके पीछे रहा होगा, जिसके चलते आज तक कोई बड़ी कारवाई हो नहीं सकी। पड़ौसी छिन्दवाड़ा जिले के कोयलाचंल के रहवासी कलेक्टर श्री तरुण कुमार पिथोड़े ने रविवार को घोड़ाडोंगरी विकास खंड के ग्राम दुलारा का भ्रमण कर यहाँ अवैध कोयला खनन पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिये। 

उन्होंने कहा कि प्रशासन व पुलिस के अधिकारी निरंतर यहाँ गश्त करें। यदि अवैध कोयला खनन होता पाया जाता है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने खनिज विभाग के अधिकारी को निर्देशित किया कि अवैध कोयला खनन में संलिप्त वाहनों को भी जप्त कर नियमानुसार कार्रवाई करें। अनुविभागीय राजस्व अधिकारी शाहपुर श्री एस के भंडारी भी इस दौरान मौजूद थे। कलेक्टर बैतूल ने टेमरूमाल, तवाकाटी, बाकोड़ी, दुल्हारा सहित अन्य क्षेत्रो में भाजपाई नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों तथा पुलिस एवं राजस्व विभाग के साथ - साथ खनिज विभाग के संरक्षण में बेखौफ चल रहे एक दर्जन से अधिक कोयला खदानों में करीब सौ सवा सौ मीटर अंदर तक गये। अण्डर ग्राऊण्ड कोयला खदानों एवं ओपन कास्ट कोयला खदानों का मिला जुला मिश्रण देखने के बाद कलेक्टर तरूण कुमार पिथोड़े एवं पुलिस अधीक्षक कार्तिकेयन ने असुक्षित अवैध कोयला खदानों में संभावित खतरे को ध्यान में रख कर सौ सवा सौ मीटर अंदर जाने के बाद वापस बैरंग लौट जाने में ही अपनी भलाई समझी। 


पाथाखेड़ा की अण्डर ग्राऊण्ड कोयला खदानों की तरह यहां पर भी पिल्लर छोड़ कर कोयला निकाला गया था लेकिन सफोट के नाम पर कुछ भी नहीं था जबकि पाथाखेड़ा की कोयला खदानों में लकड़ी सिल्ली को लगाया जाता था। कोयला खदान के मुहाने से लेकर कार्य स्थल तक पाईप के अंदर केबल के माध्यम से बिजली की सप्लाई दी गई थी जिससे कोयला को कटिंग करके निकाला जाता था। इतना बड़ा नेटवर्क अवैध कोयला खदानों में बीते 15 वर्षो से बेखौफ चलता रहा जिसके चलते एक कोरियर कंपनी के लिए डाक बांटने वाले ने करोड़ो की जमीन जायजाद बना डाली। 

घोडाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र में बीते 15 वर्षो से अधिक समय से भाजपा के विधायक एवं भाजपा के पदाधिकारियों के संरक्षण में कोयला का काला बाजार फल फूल रहा था। इन अवैध कोयला खदानों में चांदामेटा - परासिया और आसपास गांव के सौ सवा सौ लोग तीन शिफ्ट में काम किया करते है। 200 सौ रूपये से लेकर 300 सौ रूपये तक मजदूरी के लिए लोग इन जानलेवा अवैध कोयला खदानों में काम करते चले आ रहे है। एक दर्जन से अधिक ऐसे मौते यहां पर हो चुकी है जिसका पुलिस रिकार्ड में कोई अता-पता नहीं है। सीवनपाट - दुल्हारा, तवाकाटी के भोले भाले आदिवासी समाज के मजदूरो से सूरज नामक व्यक्ति द्वारा दैनिक वेतन देकर काम करवाया जाता था। प्रतिदिन इन कोयला खदानों से घोडाडोंगरी से शाहपुर को जाने वाले रास्ते से सीधे कोयला इन्दौर, प्रीथमपुर की ओर भेजा जाता था। 

इस अवैध कोयले के काला बाजार में घोडाडोंगरी पुलिस, शाहपुर तथा चोपना पुलिस के साथ दोनो ही एसडीओपी एवं एसडीएम शाहपुर तथा घोडाडोंगरी एवं शाहपुर तहसीलदार से लेकर उनके नीचले स्टाफ तक मोटी रकम पहुंचाई जाती थी, जिसके चलते कोयले का कालाबाजार फल फूलता चला गया। बैतूल स्थित खनिज विभाग एवं जिले के कुछ सत्ताधारी दल से जुड़े लोगो को भी माहवारी मोटी रकम देकर प्रेस पुलिस प्रशासन को मैनेज करने का सच आखिर सामने आ ही गया। 

बैतूल जिले की इन कोयला खदानों को वेकोलि एवं कोयला मंत्रालय से कई बार अपने अधिग्रहण लेने की मांग की जाती रही लेकिन कोयला मंत्रालय एवं वेकोलि प्रबंधन की अनदेखी के चलते कोयला का अवैध कारोबार चलता रहा। जिन खदानों का कलैक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने निरीक्षण किया गया उसमें से दस कोयला खदान में जेसीबी के माध्यम से तवा नदी का पानी को डायर्वट करके छोड़ा गया। अभी मात्र दो ही कोयला खदानों को पूरी तरह से बंद किया है, शेष 10 से अधिक कोयला खदानों को पूरी तरह से बंद नहीं किया जा सका है।
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News Digital India 18

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