पुलवामा हमले पर ब्रिटिश लेखकों ने कहा – शांति के लिए युद्ध जरुरी, पर सेकुलरिज्म ने भारत की इस परंपरा को मार दिया



War for peace is necessary
भारत को आज अपनी क्षत्रिय परंपरा को अपनाने की महती जरुरत


''पुलवामा में आतंकी हमले के बाद ब्रिटिश मूल के लेखकों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा है शांति के लिए युद्ध जरुरी है, पर सेकुलरिज्म ने भारत की इस परंपरा को मार दिया है. आज भारत को अपनी क्षत्रिय परंपरा को अपनाने की महती जरुरत है.'' 

- Ravi Singh / edited by Drishti   

हमारे देश को सबसे ज्यादा बर्बाद सेकुलरिज्म ने किया है, ये वही सेकुलरिज्म है, जिसने सांपों को पाला है और इसी कारण देश के हर कोने में आज मिनी पाकिस्तान बने हुए हैं. 

पुलवामा में इस्लामिक संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कायराना IED हमले के बाद AMU से लेकर हमारे देश में कई जगह, जिन्हें मिनी पाकिस्तान के रूप में पहचाना जाने लगा है, में जश्न भी मनाया गया. 

कुछ मुस्लिम पत्रकार और साथ में अब तो कई सेक्युलर पत्रकार भी इस बात से भड़क रहे हैं कि पाकिस्तान से बदले की बात क्यों की जा रही है, बदले की बात करने वाले बीमार हैं, बदले की बात नहीं होनी चाहिए.
पुलवामा हमले के बाद अमेरिकी मूल के लेखक डॉ डेविड फरौली का भी बयान सामने आया है, जिन्होंने भारत को उसके इतिहास को याद दिलवाने की कोशिश की है.
डॉ डेविड फरौली ने कहा कि - भारत को अब अपने क्षत्रिय परंपरा को अपनाने की जरुरत है, जो की महाभारत, रामायण की परंपरा है, भारत को अपने ऊपर हमलों को बर्दास्त करना बंद करना होगा, याद रखें कि माँ दुर्गा के हाथों में कई हथियार हैं. 
डॉ डेविड फरौली के बयान पर फ्रेंच मूल के लेखक फ़्रन्कोइस गौतिएर ने भी एक कडवी बात कही है. उन्होंने कहा - भारत की क्षत्रिय परंपरा को बुद्धिज़्म और गाँधी ने मार दिया है, और भारत में इस्लामिक आक्रान्ताओं ने इतना आतंक मचाया है कि हिन्दू जल्दी ही डर जाते हैं, सिर्फ भारतीय सेना के पास कुछ क्षत्रिय परंपरा बची है, पर राजनीति करने वालों में ये परंपरा ख़त्म हो चुकी है.
इन दोनों ही विदेशी मूल के लेखकों ने एक कडवी बात कही है, पर सच ही कहा है -हमारे भगवान् शिव हों, राम हों, दुर्गा हो, काली हो, हमारे हर भगवान् के हाथ में हथियार है, महाभारत रामायण भी सीख देती है कि शांति के लिए युद्ध जरुरी है, पर सेकुलरिज्म ने भारत की इस परंपरा को लगभग ख़त्म कर दिया है.  
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