यहाँ मिलता है काजू सब्जी के भाव 20 रुपये किलो

''सूखे मेवों में काजू की एक अलग ही अहमियत है जिसे हर कोई खाना पसंद करता है. लेकिन बढ़ती महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है. जब आदमी बाज़ार में काजू के दाम पूछता है, सबसे पहले वह अपनी जेब टटोलता है. क्योंकि बाज़ार में कोई भी ऐसा मेवा नहीं है जो 800 या 1000 रुपये प्रतिकिलो से कम हो, लेकिन इस देश में एक ऐसा शहर है जहां सब्जियों के दाम पर काजू बिकता है.''

स्वस्थ रहने के लिए जिस तरह हमारे जीवन में योग और प्राणायाम की जरूरत होती है, उसी तरह पौष्टिक आहार का सेवन करना बहुत महत्व रखता है. पौष्टिक आहारों में सूखे मेवों का इस्तेमाल भी काफी महत्व रखता है. सूखे मेवे न सिर्फ पोषण के लिए खाए जाते हैं, बल्कि यह तरह तरह के मिठाइयों और पकवानों को बनाने में भी इस्तेमाल होते हैं.

इन्हीं सूखे मेवों में काजू की एक अलग ही अहमियत है जिसे हर कोई खाना पसंद करता है. लेकिन बढ़ती महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है. जब आदमी बाज़ार में काजू के दाम पूछता है, सबसे पहले वह अपनी जेब टटोलता है. क्योंकि बाज़ार में कोई भी ऐसा मेवा नहीं है जो 800 या 1000 रुपये प्रतिकिलो से कम हो, लेकिन इस देश में एक ऐसा शहर है जहां सब्जियों के दाम पर काजू बिकता है. 

हम बात कर रहे हैं झारखंड के जामताड़ा जिला की. जामताड़ा जिला मुख्यालय से लगभग चार किमी. की दूरी पर 49 एकड़ में काजू के बागान हैं. यहां प्रतिवर्ष हजारों टन काजू की पैदावार होती है. यहां के बागानों में काम करने वाले लोग इसे सस्ते दामों यानी 10 से 20 रुपये किलो बेच देते हैं जो कि औसतन सब्जियों के मूल्य के बराबर है. यही कारण है कि भारी तादात में लोग यहां से सस्ते दामों में काजू खरीद कर ले जाते हैं. तो आप अगर कभी झारखंड जाएं तो वहां से काजू लेना न भूलें.

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