इन बेकसूरों की निर्मम हत्या ह्रदय विदारक है, अपराध रोकने दृढ़ निर्णय लेने होगे


ये दोनों बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं. चित्रकूट से 12 दिन पहले अगवा किये छह वर्षीय जुड़वां मासूमों प्रियांश और श्रेयांश रावत बचाये नहीं जा सके. इन बेकसूर मासूमों की निर्मम हत्या ह्रदय विदारक है. इनके अपहरणकर्ताओं ने 25 लाख रुपयों की फिरौती की रकम मिलने के बाबजूद दोनों फूल से बच्चों की जान ले ली. 
- आलोक वाजपेयी   

अब तक पूरी तरह नाकाम रहे पुलिस प्रशासन से अब कम से कम इतनी उम्मीद तो की ही जानी चाहिए कि वे नरपिशाच अपहरणकर्ताओं के खिलाफ पर्याप्त परिस्थितिजन्य सबूत जुटाकर उन्हें फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कड़ी सजा देंगे.  

सरकार की मंशा पर सवाल उठना लाजमी है. मामले में पुलिस की नाकामी साफ जाहिर होती है. मुख्यमंत्री कमलनाथ जी को इसे अपने शासन की पहली बड़ी चुनौती मानते हुए स्वयं पूरे मामले की मॉनीटिरिंग करना चाहिए. 

एक प्रतिक्रिया 
श्री रामजीत सिंह जी लिखते हैं- 'क्या कभी भी यह ठंडे दिमाग से सोचा जायेगा कि हमारे वैचारिक मतभेद हो सकते हैं. हमारे आपसी झगड़े हो सकते हैं, लेकिन इन सब की कीमत क्या मासूमियत चुकायेगी? सत्ता हो या समाज एक दूसरे के ऊपर आरोप लगाकर अपराध कभी भी कम नहीं हो गए. इस के लिए दृढ़ निर्णय लेने होगे..'


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