राममंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम होगा, सरकार का अध्यादेश लाना आसान नहीं, सहयोगी ही खिलाफत के मूड में


मंदिर मुद्दे पर मोदी सरकार अध्यादेश लाने के चक्कर में है, लेकिन जल्दबाजी नहीं करना चाहती
बजह ''कहीं सरकार की ज्यादा छीछालेदार न हो जाए''

''राम मंदिर मुद्दे पर मोदी सरकार अध्यादेश लाने के चक्कर में है, लेकिन वह इसके लिए कोई जल्दबाजी नहीं करना चाह रही है. बजह है कि उसके अपने सहयोगी दल भी इस पक्ष में नहीं हैं. ऐसे में वह उसे पास नहीं करा सकेगी. और तब सरकार की ज्यादा छीछालेदार तय हो जायेगी.'' 
- बलभद्र मिश्रा   

यह बात आज बृहस्पतिवार को और ज्यादा साफ़ हो गई जब मीडिया से बात करते हुए भाजपा के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने राम मंदिर मुद्दे पर अध्यादेश लाया जाए बात का विरोध किया. उन्होंने कहा राम मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जो भी निर्णय दे, वह सभी को स्वीकार्य होना चाहिए, चाहे वे हिंदू हों, मुस्लिम हों या अन्य समुदाय के लोग हों.

अध्यादेश लाने की बात पर उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के ऐसा कहने कि हम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार करेंगे, सभी अगर-मगर खत्म हो जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ही अंतिम होना चाहिए. मगर प्रधानमंत्री की बात से साफ़ है कि उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को देख रही है, यदि वह मनमाफिक नहीं आता तो सरकार अध्यादेश लाने का प्रयास अवश्य करेगी, हालांकि वह इसके लिए कोई जल्दबाजी नहीं करना चाह रही है. बजह है कि उसके अपने सहयोगी दल भी इस पक्ष में नहीं हैं. ऐसे में वह उसे पास नहीं करा सकेगी. और तब सरकार की ज्यादा छीछालेदार तय हो जायेगी.

यह पूछने पर कि इस मुद्दे पर क्या वह अध्यादेश का समर्थन करेंगे तो पासवान ने कहा कि उनका रूख एक समान रहा है और वह इसका समर्थन नहीं करेंगे. 

उल्लेखनीय है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि इस मुद्दे पर सरकार कोई निर्णय नहीं करेगी, जब तक कि न्यायिक प्रक्रिया खत्म नहीं हो जाती है. यानि सरकार न्यायिक प्रक्रिया के बाद आवश्यक लगा तो अध्यादेश की बात कर रही है. विश्व हिंदू परिषद् जैसे हिंदुवादी समूह अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग करते रहे हैं. 

लोजपा अध्यादेश का विरोध करने वाली भाजपा की दूसरी बड़ी सहयोगी है. इससे पहले हाल में विवादास्पद मुद्दे को या तो अदालत के फैसले के माध्यम से या फिर विभिन्न समूहों के बीच परस्पर सहमति से हल किया जाना चाहिए' कहकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अध्यादेश के खिलाफ बात कर चुके हैं. 

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