मामला मीडिया को विज्ञापन का, करोड़ों में से 'ऊँट के मुंह में जीरा' भी नहीं मिलता छोटे पत्र-पत्रिकाओं को





''मध्यप्रदेश की वर्तमान कमलनाथ सरकार का मीडिया को विज्ञापन के मामले में मानना है कि विज्ञापन के नाम पर जनता का यह पैसा सरकार के चेहरा चमकाने के काम आता रहा है. और प्रदेश की नई कमलनाथ सरकार दिखावे की जगह काम पर ज्यादा ध्यान देगी. वहीं दुसरी ओर मध्यप्रदेश के अनुपूरक अनुमान 2018-2019 को देखें तो केवल 2 माह का विज्ञापन के लिए 97 करोड़ का अनुमान है. जनसंपर्क विभाग मांग संख्या 32 में 99 करोड़ 87 लाख में 97 करोड़ विज्ञापन के लिए मांग है. माना जा सकता है कि सरकार मीडिया की भूमिका को अच्छे से समझती है.''
बलभद्र मिश्रा की रिपोर्ट


वास्तविक मामला यह है कि मध्यप्रदेश में विज्ञापन के नाम पर पूर्व सरकार में एक बड़ा घोटाला हुआ है. विज्ञापन के नाम पर चुनिन्दा लोगों को कई लाखों बांटे गए हैं. इस बात को लेकर वर्तमान सरकार सख्त हो रही है. अब सरकार विज्ञापन के लिए नई नीति तैयार कर रही है. 


मध्यप्रदेश शासन 2018-2019 का द्वितीय अनुपूरक अनुमान, जो जनवरी 2018 में विधान सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया, में जनसंपर्क विभाग

मीडिया का काम सरकार की जनहितैशी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ आम जनता की समस्याओं को सरकार के सामने लाने का रहता है और इसके लिए उसे विज्ञापन के रूप में सरकार से सहयोग मिलता है. हम समझते हैं सरकार यह भी अच्छे से जानती है कि बीते समय में मीडिया ने विपक्ष की भूमिका का भी खूब निर्वाह किया है. सो मीडिया को सरकार नजरअंदाज कर रही है ऐसा नहीं कहा जा सकता, लेकिन पिछले अगस्त 2018 के बाद से छोटे पत्र-पत्रिकाओं को कोई विज्ञापन नहीं मिला है. इतना ही नहीं करोड़ों के बजट में अंश मात्र की राशि 15000/- अगस्त 2018 के बिल का भुगतान भी नहीं हो सका है और चर्चा में है कि इस बार 26 जनवरी का भी विज्ञापन इन्हें नहीं मिल रहा. कहने का मतलब है 'करे कोई भरे कोई' छोटे पत्र-पत्रिकाओं के और वास्तविक पत्रकार परेशानी में आ गए हैं.

मध्यप्रदेश की पूर्व की बीजेपी सरकार विकास की बातें करते हुए प्रदेश को गहरे कर्ज में उतार गई. नई सरकार आर्थिक परेशानी में बताई जा रही है. पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया का बयान तो याद होगा ही कि हमें प्रदेश की हालत जैसी मिली थी हमने वैसी ही छोड़ी है, जबकि कर्ज की बात करें तो बहुत बुरी हालत में है आज मध्यप्रदेश. अब इस प्रकार की समस्याओं से निपटने सरकार ने केंद्र से 1000 करोड़ की मांग की है. सूत्रों के अनुसार इस प्रकार की चिट्ठी केंद्र को लिखी गई है. वहीं किसान कर्ज माफी की भी बड़ी समस्या सरकार के सामने है, जिसकी प्रक्रिया चालू हो गई है. सरकार इसके लिए 1000 करोड़ का कर्ज लेने की भी तैयारी कर रही है. 



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