'वंदे मातरम' विवाद में आप के संजय ने बताया शिवराज को 'फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी'


''मध्यप्रदेश सचिवालय में वंदे मातरम न गाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. बीजेपी इसके विरोध में प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस ने नए ढंग से ज्यादा औत्साह के साथ गाये जाने की बात कही है. इस बीच आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कुछ अलग बात कह दी है.''

उन्होंने ट्विटर के ज़रिए पोस्ट में कहा, 'वन्दे मातरम् तो गाना चाहिये, लेकिन वन्देमातरम् गाकर व्यापम, कोयला और डम्पर का घोटाला कैसे किया जाता है ये ज्ञान 'फ़र्ज़ी राष्ट्रवादियों' से प्राप्त करना चाहिये, की नहीं करना चाहिये'. इस प्रकार शिवराज का नाम लिए बगैर अप्रत्यक्ष रूप से उन्होंने शिवराज पर बड़ा हमला किया है. 

असल में सचिवालय में 13 सालों से महीने की पहले कार्यदिवस पर वंदे मातरम गाने की परंपरा थी. इस वर्ष के प्रारंभ में 1 तारीख को गायन नहीं किया गया. इस पर 

बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आपत्ति जताई. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, वंदे मातरम से देशभक्ति की भावना हृदय में प्रज्वलित होती है. इसीलिए बीजेपी सरकार ने हर सप्ताह कैबिनेट मीटिंग से पहले वंदे मातरम गान का फैसला किया.

इससे पहले पूर्व सीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ट्विटर के ज़रिए कहा, अगर कांग्रेस को राष्ट्र गीत के शब्द नहीं आते हैं या फिर राष्ट्र गीत के गायन में शर्म आती है, तो मुझे बता दें, हर महीने की पहली तारीख़ को वल्लभ भवन के प्रांगण में जनता के साथ वंदे मातरम् मैं गाऊंगा. उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस शायद यह भूल गई है कि सरकारें आती है, जाती है लेकिन देश और देशभक्ति से ऊपर कुछ नहीं है. 

शिवराज सिंह के 'वंदे मातरम' को लेकर दिए इस बयान पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रतिक्रिया में ट्विटर के ज़रिए कहा 'वन्दे मातरम् तो गाना चाहिये, लेकिन वन्देमातरम् गाकर व्यापम, कोयला और डम्पर का घोटाला कैसे किया जाता है ये ज्ञान 'फ़र्ज़ी राष्ट्रवादियों' से प्राप्त करना चाहिये, की नहीं करना चाहिये'. इस प्रकार शिवराज का नाम लिए बगैर अप्रत्यक्ष रूप से उन्होंने शिवराज पर बड़ा हमला किया है. 

वंदे मातरम हमारे दिल की गहराइयों में -मुख्यमंत्री कमलनाथ
वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के जवाब में कहा है कि यह निर्णय ना किसी एजेंडे के तहत लिया गया है और ना ही हमारा वंदे मातरम गान को लेकर कोई विरोध है. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम हमारे दिल की गहराइयों में बसा है. हम भी समय-समय पर इसका गान करते हैं. 

उन्होंने कहा कि हम इसे फिर से शुरु करेंगे, लेकिन एक अलग रूप में. कमलनाथ का मानना है कि सिर्फ एक दिन वंदे मातरम गाने से किसी की देशभक्ति या राष्ट्रीयता परिलिक्षित नहीं होती है. देशभक्ति व राष्ट्रीयता को सिर्फ एक दिन वंदे मातरम गान से जोड़ना गलत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में रहने वाला हर नागरिक देशभक्त, राष्ट्र भक्त है. उससे किसी भी प्रकार के प्रमाणपत्र लेने की और ना उसे किसी को देने की आवश्यकता है. 

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