प्रजापति विधानसभा अध्यक्ष घोषित, किरकिरी से बचने भाजपा ने वॉक आउट कर निकाला पैदल मार्च?




''कल ही खबर थी कि कांग्रेस सरकार पूर्ण बहुमत में नहीं है. उस पर खतरे के बादल मंडराते रहेंगे, इसलिए वह और शिवराज सिंह चौहान भी व्यापम, डम्फर जैसे घोटालों से बचने के लिए एक दुसरे का साथ ठीक से देंगे या यूं कहें कि एक दुसरे का साथ देने के लिए मजबूर हैं, लेकिन आज सदन में जो हुआ उससे साफ़ हो गया है कि ऐसा कुछ नहीं है. ''



मामला विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव को लेकर शुरू हुआ. चर्चा है कि भाजपा के ही कुछ विधायक टूट रहे थे, सो किरकिरी से बचने भाजपा ने वॉक आउट कर राजभवन तक पैदल मार्च शुरू कर दिया. इसी के साथ लगे हाथ कांग्रेस के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने शिवराज को भागने के लिए नकली टायगर बता दिया. अब मामला गर्म है. 

मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र के दूसरे दिन आज मंगलवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने खड़े होकर नए विधायकों और नेता प्रतिपक्ष को बधाई दी, इसके बाद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने खड़े होकर सबका धन्यवाद दिया और उन्होंने सदन के नेता को विश्वास दिलाया कि वे सरकार के साथ मिलकर प्रदेश की तरक्की के लिए काम करेंगे, लेकिन इसके बाद कुछ ऐसा हुआ, जिससे जोरदार हंगामा मच गया और बीजेपी ने वॉक आउट कर राजभवन तक पैदल मार्च शुरू कर दिया. बीजेपी के विधायकों ने सदन से वॉक आउट कर दिया और राजभवन तक पैदल मार्च किया. 

इधर सदन में प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना ने ऐलान कर दिया कि एनपी प्रजापति विधानसभा अध्यक्ष होंगे. उन्होंने पांच नियमों का उल्लेख करते हुए नियम और प्रक्रियाओं का हवाला दिया है. इसके बाद बीजेपी विधायकों ने सदन में जोरदार हंगामा कर दिया. उनका कहना है कि यह एक तरफा फैसला है. बीजेपी के उम्मीदवार विजय शाह के नाम का प्रस्ताव साथ साथ सदन में क्यों नहीं रखा गया. इसलिए बीजेपी विधायक गर्भगृह में पहुंचकर नारे लगाने लगे. बीजेपी के विधायकों ने सदन से वॉक आउट कर दिया और राजभवन तक पैदल मार्च किया. 

मत विभाजन में प्रजापति को 120 मत मिले और वे  विधानसभा के अध्यक्ष घोषित किये गए.

आज का दिन काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा, हम अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे 
-पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह 
पैदल मार्च के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा है मध्यप्रदेश विधानसभा में जो आज हुआ, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. लोकतंत्र में आज का दिन काले अध्याय के रूप में याद किया जायेगा. विधायी मूल्यों की रक्षा के लिए हम अपनी अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे.

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