हैप्पी न्यू इयर 2019, बनके सबा बागे वफ़ा में..

स्मित हास्य से तुम   


''सुनो हर साल की तरह आज भी यह सृष्टि नए साल के आगमन की तैयारी कर रही है। और इस साल की विदाई पुरे जश्न के साथ,तुम्हारी  दुनियाँ में ऐसा होता है क्या?''
- सुरेखा अग्रवाल 'स्वरा'

मुझे तुम हमेशा एक जैसे दिखते हो अड़िग समय का कोई अच्छा या बुरा फर्क नही पड़ता अगर पड़ता भी है तो वही अडिगता दिखती है तुममें, पर आज  पुराने साल को एक पाती लिख रही हूँ मै तुम भी पढ़ो... प्रिय२०१८

तुम इस तरह छोड़ कर जा रहे हो सोचा नही था,पुरे साल तुम मेरे साथ रहे,हर पल , मेरे अल्फाज़ो को बारीकी से ,तो कभी आँसुओ से कभी मुस्कुराकर तो कभी हँसकर समेटा, हर तरह से साथ निभाया,और अब इस तरह आज तुम मुझसे हमेशा के लिए विदा ले रहे हो,क्या ऐसा नही हो सकता की हम तुम हमेशा साथ रहे? ये तारीखे ये साल और यह वार बहुत तकलीफदेह होते हैं, रोज नए काम रोज एक नई जिंदगी रोज के फंडे और रोज एक अनकहा लम्हा , जिसमें सोचने की जद्दोजहद और डर,  यह समय जो तुम्हारे साथ चलता हैं, बहुत डराता हैं मझे...

सुनो उसे कह दो की कुछ तो बता दे की अगले पल क्या होने वाला हैं,जानते हो मै जानती हूँ जिंदगी का कोई ठिकाना नही फिर भी मै जीती हूँ,एक अजीब से डर के साथ,,यह भी जानती हूँ की हम सब एक दिन तुम्हारी तरह बिछड़ जाएंगे कभी न मिलने के लिए,फिर भी हम हावी होते हैं एक दूसरे पर, देखो ना यह समाज यह दुनिया सब को छोड़  के जाना हैं, फिर भी हम खुश नही रह पाते यह रहस्य हो सके तो समझा के जाओ ना प्रिय...मुझे पता हैं जो मै तुमसे कह रही हूँ वह तुम किसी  से नही  कहोगे फिर भी मुझे यह तस्सली देते जाओ की आने वाला कल मुझे किसी भी तरह का डर,  तकलीफ नही देगा,   

सुनो यही भी समझा  जाओ की चाहे कितना भी अच्छा और बुरा करने वाला  हो कोई वह भी एक दिन विदा लेगा एक दिन तुम्हारी तरह,बस यादें ही रहती हैं, पर वह यादे भी तभी तक जब उस समय किसी के साथ कोई अच्छा या बुरा हादसा हो तब,वरना तुम्हे या मुझे कोई क्यूँकर कोई याद रखेगा,हैं जवाब तुम्हारे पास इसका,सुनो अगर हैं तो मुझे जरूर बता जाना, यह गुस्सा ,यह नफरत ये  यह सियासत और रिश्तो का मकड़जाल भी एक  तरह का अस्तित्वहीन मोहपाश हैं, जिसका अंत   बस तुम्हारी तरह ही हैं, कैसे समझाऊँ सबको की जब तक साँस हैं तब तक "हम" या "मै" हैं जहाँ साँसे उखड़ी नही हम हो जाते हैं ..एक निर्जीव ,निराकार  अवचेतन  मुर्दा मात्र....!

 जहाँ उसके कोई रिश्तें,कोई पहचान प्यार दोस्ती   कुछ नही रहता मात्र वह एक देह रह जाती हैं जो किसी काम की नही होती,गुस्सा द्वेष अकारण परेशानी  बेवजह हैं, सुनो....प्रिय सिर्फ मुझे इतना समझा जाना जैसे तुम जा रहे हो वैसे मै भी विदा लुंगी एक दिन,शेष कुछ नही रहेगा,देखो न आज मै तुम्हे पूछ रही हूँ यह जानते हुए की तुम पल भर मे मुझसे अंतिम विदाई लेने वाले हो,और कल इसवक्त तुम्हारा वजूद न नही रहेगा कैसे  पुछु तुम्हे कैसे लग रहा हैं पर मै जानती हूँ यह स्वार्थी मानव तुम्हारी जाने पर दुखी नही हो रहा देखो ना  सब नए साल की ख़ुशी और तुम्हे अंतिम विदाई कितनी ख़ुशी से  दे रहा हैं, मेरा भविष्य और अंत    

मुझे दिख रहा हैं क्रंदन कर रहा हैं मेरा अंतर्मन ..की कल मै भी विदा लुंगी  मेरा भी अस्तित्व नही रहेगा,बस तुम्हारी तरह मुझे भी शानदार विदाई दी जाएगी और दूसरे पल एक नया अस्तित्व और जिंदगी की सफल शुरुवात होगी ...प्रिय मै भी तुम्हे अंतिम विदाई देती हूँ फिर कभी न मिलने के लिए...तुमने जितना भी दिया उसका तहे दिल से आभार और जो तकलीफदेह रहा उसका दोष नही दूंगी क्योंकि वह तुम्हारे वश मे नही था,,प्रिय  हाँ एक गाना सुनाना चाहूंगी तुम्हे  सुनोगे??सुनकर उसे गुनगुना जरूर... 
रहे ना रहे हम, महका करेंगे बनके
कली
बनके सबा बागे वफ़ा में ... इसी के साथ अलविदा प्रिय २०१८


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1 comments:

  1. बहुत बहुत बेहतरीन पड़ाव से आगे

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