राफेल पर राहुल से माफी की मांग, अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा कदम, उठाना पड़ सकता है लोकसभा चुनाव में बड़ा खामियाजा




''राफेल पर यदि बीजेपी राहुल के खिलाफ माफी माँगने जैसी बात पर अड़ी रही तो बीजेपी का यह कदम अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा, क्योंकि तब यह मुद्दा जीवित रहेगा, जिसका खामियाजा आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उठाना पड़ सकता है.'' 
- चित्रांश /बलभद्र मिश्रा   
डिजिटल इंडिया 18 न्यूज़ डेस्क     



राफेल विमान सौदे पर पिछले काफी समय घेरे में रही मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे को बिल्कुल ठीक बताया है और इससे जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है, लेकिन पूरे मामले पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राफेल में प्रमुख बात कीमत को लेकर है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कह कर कि 'कीमतों के तुलनात्मक विवरण पर फैसला लेना अदालत का काम नहीं है', मामले में कांग्रेस को पूरी गुंजाइश छोड़ दी है कि वह इस मुद्दे को उठाती रहे. विश्लेषकों का मानना है कि अब ऐसे में यदि बीजेपी इस मुद्दे पर राहुल के खिलाफ माफी माँगने जैसी बात पर अड़ी रही तो वह अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा, क्योंकि तब यह मुद्दा जीवित रहेगा, जिसका खामियाजा आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उठाना पड़ सकता है. 
सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे को बिल्कुल ठीक बताया है और इससे जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है राफेल विमान सौदे में कोई संदेह नहीं है. राफेल की गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं हैं. राफेल सौदे में कोई संदेह नहीं है इसलिए इससे जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज किया जाता है.

कोर्ट ने कहा है कि राफेल विमान हमारे देश की जरूरत है. चीफ जस्टिस ने कहा कि ऑफसेट पार्टनर की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है. किसी व्यक्ति के लिए निजी धारणा के आधार पर डिफेंस डील को निशाने पर नहीं लिया जा सकता है. राफेल सौदे के दाम, प्रक्रिया और ऑफसेट पार्टनर किसी भी मुद्दे पर हमें कोई दिक्कत नहीं है. कोर्ट ने कहा इस फैसले को लिखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और सौदे के नियम को ध्यान में रखा गया है. मूल्य और जरूरतें भी हमारे ध्यान में रही थीं.

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि कीमतों के तुलनात्मक विवरण पर फैसला लेना अदालत का काम नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि कीमत की समीक्षा करना हमारा काम नहीं है और हमारे पास वो विशेषज्ञता भी नहीं है, जिससे कीमत की समीक्षा हो सके. 

केंद्र सरकार ने फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान खरीदने के सौदे का बचाव किया था और इनकी कीमत से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग का विरोध किया था. भारत ने करीब 58,000 करोड़ रुपए की कीमत से 36 राफेल विमान खरीदने के लिए फ्रांस के साथ समझौता किया है. 



कांग्रेस पार्टी लगातार राफेल के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरती रही है. चुनावी रैलियां हो, संसद हो या फिर ट्वीट के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है. उन्होंने 'चौकीदार चोर है', जैसी बात भी कही है. उनका आरोप है कि जो विमान उनकी सरकार 580 करोड़ में खरीदी की बात कर रही थी, वही विमान मोदी सरकार 1600 करोड़ से भी अधिक में खरीद कर कमीशन खोरी कर रही है. 

राफेल विमान खरीद सौदे में अनियमितताओं के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलने की गूंज आज संसद के दोनों सदनों में भी सुनायी दी तथा सरकार ने विपक्ष कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए राहुल गांधी से देश और संसद से माफी मांगने की मांग की. संसद में राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी से झूंठ के लिए 'माफी मांगें' कहा है. वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपने रुख में कोई ढिलाई नहीं बरतते हुए कहा कि यह मुद्दा जनता की अदालत में अभी तक कायम है. कांग्रेस ने दोनों सदनों में इस मुद्दे की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराये जाने की मांग की है.




इधर राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कांग्रेस पर पलटवार करते हुए अमित शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट झूठ की राजनीति करने वालों के मुंह पर तमाचा है. राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि 'मैं सर्वोच्च अदालत के फैसले का स्वागत करता हूं. सच की जीत हुई. आजादी के बाद एक कोरे झूठ के आधार पर देश की जनता को गुमराह किया गया. यह प्रयास देश की सबसे पुरानी पार्टी ने किया. कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने व पार्टी के फायदे के लिए झूठ की एक नई राजनीति की शुरुआत की है. अमित शाह राहुल से जानकारी का सोर्स सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं. 

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जब-जब सत्ता में रहती है तब तब घोटाले करती है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बताएं कि आखिर उनके आरोपों के आधार क्या था? आखिर आपने देश की सुरक्षा को खतरे में क्यों डाला? आखिर आपने किसकी सूचना के आधार पर आरोप लगाए? उन्होंने कहा राफेल खरीद के सम्बन्ध में देश की जनता को गुमराह करने और सेना के बीच में सन्देह पैदा करने के लिए राहुल गांधी को देश की जनता से मांफी मांगनी चाहिए. राहुल गांधी देश की जनता को जवाब दें कि वो किस आधार पर देश की जनता को गुमराह कर रहें थे? वहीं राफेल डील के खिलाफ याचिकाकर्ताओं में से एक वकील प्रशांत भूषण ने राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एकदम गलत बताया है. 

उन्होंने कहा है कि एयरफोर्स ने कभी नहीं कहा था कि 36 राफेल विमान चाहिए. एयरफोर्स से बिना पूछे मोदी जी ने फ्रांस में जाकर समझौता कर लिया और तय कीमत से ज्यादा पैसा दे दिया. श्री भूषण ने कहा कि कोर्ट में कीमतों पर सीलबंद रिपोर्ट दे दी, जिसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं दी गई. वहीं कोर्ट ने ऑफसेट पार्टनर चुनने के मामले में भी गलत नहीं माना है. कोर्ट का कहना है कि दसॉल्ट ने ऑफसेट पार्टनर चुनना है. प्रशांत ने तर्क दिया कि रक्षा सौदे में बिना सरकार की सहमति के कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है. 

मामले पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला कांग्रेस के लिए कोई झटका नहीं है, क्योंकि राफेल सौदा जनता की अदालत में अब भी कायम है. पार्टी इस विषय को संसद में उठाना जारी रखेगी. 

रणदीप सुरजेवाला ने कहा है 'मोदी जी अगर आप नहीं डर रहे हैं तो आप जेपीसी की जांच से क्यों डर रहे हैं. इसकी जेपीसी जांच होनी ही चाहिए, तभी सारी परतें खुलेंगी.'



पूरे मामले पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राफेल में प्रमुख बात कीमत को लेकर है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कह कर कि 'कीमतों के तुलनात्मक विवरण पर फैसला लेना अदालत का काम नहीं है', मामले में कांग्रेस को पूरी गुंजाइश छोड़ दी है कि वह इस मुद्दे को उठाती रहे. विश्लेषकों का मानना है कि अब ऐसे में यदि बीजेपी इस मुद्दे पर राहुल के खिलाफ माफी माँगने जैसी बात पर अड़ी रही तो वह अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा, क्योंकि तब यह मुद्दा जीवित रहेगा, जिसका खामियाजा आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उठाना पड़ सकता है. 

जनता में भी मामले को लेकर स्पष्ट बात नहीं पहुँच सकी है. लोग अपने अपने ढंग से देख रहे हैं. सोशल मीडिया पर अलग राय भी आ रही है. Prasanna Soni लिखते है 'सवाल कीमत पर था और फैसला प्रक्रिया पर दिया. कीमत की समीक्षा करना हमारा काम नहीं और हमारे पास वो विशेषज्ञता नहीं, जिससे कीमत की समीक्षा हो सके. अगर विशेषज्ञता नहीं थी तो माननीय जाँच का आदेश देते, लेकिन ख़ारिज ही कर दिया. मुझे तो झोल लग रहा है.'

Madhur Gupta ने कटाक्ष किया है 'चौकीदार ने हमारा कमीशन दे दिया है, इसीलिए अब वो चोर नहीं रहा...




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