सिविल सेवा में सामान्य अभ्यर्थियों की आयु घटाने का मामला, मोदी सरकार सामान्य वर्ग के निशाने पर, युवाओं ने लिखा 'क्या सही में पकौड़े तलवाओगे'



सामान्य अभ्यर्थियों की आयु 30 से घटाकर 27 करने के चक्कर में मोदी सरकार, नीति आयोग किया सिफारिश

''मोदी सरकार सिविल सेवा भर्ती में सामान्य अभ्यर्थियों की आयु 30 से घटाकर 27 करने के चक्कर में है. केंद्र सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु कम करने की सिफारिश की है. आयोग ने कहा है कि सिविल सेवा में सामान्य वर्ग के कैंडिडेट के लिए वर्तमान अधिकतम आयु 30 से घटाकर 27 वर्ष कर दी जानी चाहिए. अब इस खबर के सामने आने के बाद मोदी सरकार सामान्य वर्ग के निशाने पर है. लोग सोशल मीडिया पर बहुत कुछ गलत लिख कर विरोध व्यक्त कर रहे हैं.'' 

वर्तमान में सिविल सेवा के लिए सामान्य वर्ग के कैंडिडेट की अधिकतम उम्र 30 वर्ष है. नीति आयोग ने सभी सिविल सेवाओं के लिए सिर्फ एक परीक्षा कराने का भी सुझाव दिया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से 'द वायर' ने लिखा है कि आयोग का कहना है सिविल सेवा में सामान्य वर्ग के कैंडिडेट के लिए वर्तमान अधिकतम आयु 30 से घटाकर 27 वर्ष कर दी जानी चाहिए, साथ ही अधिकतम आयु घटाने की प्रक्रिया 2022-23 तक पूरी हो जानी चाहिए. इसके अलावा आयोग ने सभी सिविल सेवाओं के लिए एक ही परीक्षा रखने की सिफारिश की है. आयोग द्वारा सभी सेवाओं में चयन के लिए सेंट्रल टैलेंट पूल बनाए जाने का भी सुझाव दिया गया है. इसमें अभ्यर्थियों को उनकी क्षमता के अनुसार विभिन्न सेवाओं में नियुक्त किया जाएगा.

नीति आयोग की रिपोर्ट ‘स्ट्रैटजी फॉर न्यू इंडिया @75’ में सुझाव दिया गया है कि सिविल सेवाओं में समानता लाने के लिए इनकी संख्या में भी कमी की जाए. बता दें कि इस समय केंद्र और राज्य स्तर पर 60 से ज्यादा अलग-अलग तरह की सिविल सेवाएं हैं.

सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में सिविल सेवाओं में चुने जाने वाले कैंडिडेट की औसत आयु साढ़े 25 साल है और भारत की एक-तिहाई से ज्यादा आबादी की उम्र इस समय 35 साल से कम है, इस लिहाज से यह अनुशंसा सही बताई जा रही है.

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि नौकरशाही में उच्च स्तर पर विशेषज्ञों की ‘लैटरल एंट्री’ को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि हर क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा विशेषज्ञों की सेवाएं मिल सकें.

रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्देश्य यह है कि अधिकारियों को उनकी शिक्षा और स्किल के आधार पर विशेषज्ञ बनाया जाएं. जहां भी जरूरी हो लंबे समय के लिए अधिकारियों की काबिलियत के आधार पर पोस्टिंग की जाए. हालांकि यह भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने का मौका मिले, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी भी जरूरी काम में लगाया जा सके.

कुछ ख़ास प्रतिक्रियाएं- 

Shridhar Uikey Abe kya sahi me pakode talao ge kya..

Deepankar Deepans Abey kabhi netao ki umr ki bhi fikr krlo..

Azmat Ahmad To phir general walo ka aplication hi band kr diya jaae kya zrurat unko 27age limits dene ki clearly says that general category is not allowed to apply..

Prahlad Gehlot बहुत गलत कर रहे हैं यह नीति आयोग वाले लोग..

Amit Kumar ये ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए नुकसानदेय फैसला है शिक्षा में उम्र सीमा कम करना सरकार की खराब नियत साफ इंगित कर रहा है। सभी सिविल सर्विस एक परीक्षा करके उस पर मनगढंत नियम थोपने का कार्यक्रम है, ठीक वैसे ही जैसे नीट में किया गया है।
नीट में भी सभी राज्य मेडिकल परीक्षा खत्म करके पहले उम्र और अटैम्पट सीमा थोपने की कोशिश की गई फिर बाद में बीएएमस होम्योपैथी वेटनरी परीक्षा को भी शामिल किया गया है।
आरक्षित अनारक्षित दोनों को मिलकर इस बदलाव का विरोध करना चाहिए।

Arjun Chordiya में खुद sc का हूँ, पर उम्र कम करने का विरोध करता हूँ। नेता लोग कब्र में पांव अटके रहने के बावजूद मंत्री बन के देश चला सकते तो कम से कम सिविल सेवा अभ्यर्थियों की उम्र 33 से 35 वर्ष करनी चाहिये. ताकि वे पूर्ण रूप से मैच्योर तो रहे।

Abhinav Mishra Ek sujhao hamara bhi le le sasure - Kyu na ye sarkar ko hi hata diya jaaye ...


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